इंदौर.
शहर में सोमवार शाम चोइथराम मंडी क्षेत्र में नगर निगम के दो कर्मचारी करण यादव और अजय यादव नियमित सफाई कार्य के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आ गए और उनकी जान चली गई. घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है. प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की गई. मुख्यमंत्री ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए दोनों परिवारों को 30-30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की. इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सीवर सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारी करण यादव और अजय यादव शाम करीब 6.30 बजे सीवर चैंबर की सफाई के लिए पहुंचे थे. मशीन और सक्शन टैंकर की मदद से काम चल रहा था. इसी दौरान पाइप का एक हिस्सा गहरे टैंक में गिर गया. उसे निकालने के लिए एक कर्मचारी अंदर उतरा और कुछ ही देर में बेहोश हो गया. दूसरे साथी ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह भी जहरीली गैस से प्रभावित होकर बाहर नहीं निकल सका.
केरकेट्टा ने बताया कि सीवरेज चैम्बर में मौजूद जहरीली गैस के कारण दम घुटने से दोनों निगम कर्मियों की मौत हो गई. उन्होंने बताया कि दोनों सफाई कर्मियों के शवों को राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की मदद से चैम्बर से बाहर निकाला गया और पोस्टमॉर्टम के लिए एक अस्पताल भेजा गया.
पुलिस उपायुक्त श्रीकृष्ण लालचंदानी ने बताया कि मृतकों की पहचान करण यादव और अजय डोडी के रूप में हुई है. मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी अमित रजक ने बताया कि दोनों निगम कर्मी बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवरेज चैम्बर में उतरे थे.
रजक ने आरोप लगाया कि घटना के दो घंटे बाद भी पुलिस, नगर निगम के कर्मचारी और एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची थी और आम लोगों ने दोनों सफाई कर्मियों को चैम्बर से बाहर निकालकर बचाने की कोशिश की.
राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित चोइथराम सब्जी मंडी गेट के पास यह हादसा हुआ. निगम कर्मचारियों के अनुसार टैंक करीब 25 से 30 फीट गहरा था. अंदर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम था. प्राथमिक आशंका है कि हाइड्रोजन सल्फाइड और मीथेन जैसी गैसें जमा थीं. बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरण के अंदर उतरना घातक साबित हुआ. शुरुआती जांच में बताया गया कि कर्मचारियों ने सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं किया. उनकी यही लापरवाही जानलेवा साबित हुई. हालांकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने पूछा है कि आखिर कब व्यवस्था सुधर पाएगी?
मौके पर मौजूद एक अन्य कर्मचारी और स्थानीय व्यक्ति ने साहस दिखाया. उन्होंने रस्सी बांधकर नीचे उतरने की कोशिश की. वे भी गैस से प्रभावित हुए, लेकिन समय रहते बाहर निकाल लिए गए. बाद में पुलिस और रेस्क्यू टीम ने दोनों कर्मचारियों को बाहर निकाला. तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. नगर निगम कमिश्नर और मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने स्थल का निरीक्षण किया. मेयर ने शोक व्यक्त किया और जांच के आदेश दिए. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए दोनों परिवारों को 30-30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश जारी किए.
यह घटना सीवर सफाई के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है. अक्सर देखा गया है कि कर्मचारी बिना गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क या सेफ्टी बेल्ट के काम करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग और असुरक्षित सीवर एंट्री पर सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर पालन में कमी दिखाई देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि हर सीवर टैंक में उतरने से पहले गैस स्तर की जांच अनिवार्य होनी चाहिए. कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना आवश्यक है.
पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. निगम प्रशासन ने भी आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं. यदि लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही गई है. यह हादसा केवल दो परिवारों का व्यक्तिगत नुकसान नहीं है. यह शहरी व्यवस्था की उस कमजोर कड़ी को उजागर करता है, जहां सफाईकर्मियों की सुरक्षा अक्सर प्राथमिकता नहीं बन पाती. अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो.