नितिनमोहन शर्मा
सुबह 6 बजे से 7 किमी सवारी मार्ग नो-व्हीकल ज़ोन, 11 बजे से 16 रास्ते बंद
- राजसी सवारी आज, उज्जैन उमड़ेंगे लाखों लाख महाँकाल भक्त, सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त
- सवारी मार्ग पर क्राइम ब्रांच, साइबर सेल, थानों की टीम सिविल ड्रेस में रहेंगी तैनात, कैमरों से भी निगरानी
सवारी में पहली बार सिंहस्थ की झांकी भी, 73 भजन मंडलियां होगी शामिल
- छह स्वरूपों में दर्शन देंगे राजाधिराज राजा महांकाल, सात बेंड सुनाएंगे भजन, 7 किमी का रहेगा सवारी मार्ग
- आकाशवाणी रेडियो पर दोपहर 2 से रात 10 बजे तक होगा लाइव प्रसारण, एफ़एम 102.5 मेगाहर्ट्ज पर सुना जाएगा
उज्जैन में बेरिकेडिंग के डर से इंदौर से रात व अलसुबह ही रवाना हुए भोले के भक्तों के जत्थे
मृत्युंजय भगवान आशुतोष की नगरी उज्जैन का नजारा देखने लायक है आज। राजाधिराज अपरान्ह 4 बजे प्रजा का हाल जानने निकलेंगे लेकिन प्रजा की बेताबी तो अलसुबह से हिलोरे मार रही हैं। भक्ति के है हिलोर शिप्रा के तट पर ब्रह्ममुहूर्त से हिलोरे ले रही हैं। एक सोमवार, दूजा अजा एकादशी और तीजी शाही सवारी तो फिर महांकाल के भक्तों के तो कहने ही क्या? ख़ुलासा फर्स्ट ने तो अपने नयन यहां सवारी के एक दिन पहले ही आधी रात से बिछा दिए हैं।
भक्तों ने भी समूचे 7 किमी के सवारी मार्ग पर अपने आराध्य के लिए पलक पाँवड़े बिछा दिए हैं। अवंतिकानाथ की अवन्तिकापुरी में एक तरफ एकादशी का स्नान पूरे उत्साह, उमंग व उल्लास से चल रहा है तो दूसरी तरफ शहर में सवारी देखने वालों को सैलाब बह रहा है। इन सबके बीच पुण्य सलिला शिप्रा का निर्मल नीर भी अपने तटबंधों को तोड़कर बह रहा हैं। अपने आराध्य की अगवानी में मानो भगवती शिप्रा भी फूली फूली इठला रही हैं।
जल पुराने पूल से सटकर बह रहा है और भक्ति भी शिप्रा तीरे तीरे कलकल बह रही है। डुबकियाँ लगा रही हैं। इसी पुर जाती शिप्रा में प्रभु महांकाल भी संध्या समय स्नान जो लेंगे। फिर यही रामघाट पर सजेंगे-सवरेंगे और प्रजा का हाल जानने निकलेंगे। आकाशवाणी से पहली बार 8 घण्टे लाइव प्रसारण का रिकॉर्ड भी इस बार बनने जा रहा हैं।
दुलहन सी सज गई है अवन्तिकापुरी
दुलहन सी सज गई है अवन्तिकापुरी। रात भर से जाग भी रही हैं। अपलक पलक झपकाए बाट निहार रही हैं उज्जयिनी। उसके आराधक जो आज पूरे लाव लश्कर के साथ जो आने वाले हैं। उन मार्गो पर उनके चाहने वालो ने अलुसुबह से पलक पाँवड़े बिछा दिए हैं। एक साथ दो दो शुभ अवसर भी सौभाग्य से आ गए हैं। एक है राजाधिराज भगवान महांकाल की शाही सवारी का दिन। दूजा है एकादशी का पावन पर्व। एक साथ आये इन दो संजोग के बाद उज्जयिनी का नज़ारा देखने लायक हैं।
यहाँ ब्रह्ममुहूर्त से ही शिप्रा तट पर स्नान भी शुरू हो गया। सुबह 4 बजे से ग्रामीण समुदाय शिप्रा के तट पर उमड़ पड़ा। पुण्य सलिला बाढ़ के पानी से लबालब बह रही हैं। जल छोटे पूल से सटकर बह रहा है। लेकिन ये जल एकादशी के स्नान के उत्साह को कम नही कर पाया। भगवती शिप्रा जहां तक ऊपर चढ़ आई, वही से डुबकी लगने लगी हैं। गणगौर दरवाजे से उतरते ही आने वाला सोमवती कुंड भी पानी मे डूबा हुआ है लेकिन डुबकी का क्रम सुबह से खबर लिखने तक जारी हैं।
शाही सवारी के उत्साह के तो कहने ही क्या?
शाही सवारी के उत्साह के तो कहने ही क्या? सावन-भादौ मास में निकलने वाली प्रभु की सवारी क्रम की ये आखरी सवारी जो हैं। शाही सवारी के नाम से निकलने वाली इस सवारी के लिए उज्जैन शहर रातभर से जाग रहा हैं। सवारी मार्ग को दुल्हन की तरह सजाया सँवारा जा रहा है। स्वागत मंचो की कतार रातभर से लग रही हैं। सरकारी बंदोबस्त भी रातभर से ठोक बजाए जा रहें हैं। सवारी मार्ग के सुरक्षा बंदोबस्त का अमला सुबह 7 बजे से पाइंट पर डट गया हैं। सवारी मार्ग सहित अनेक रास्तों पर वाहनों की आवाजाही सुबह 7 बजे से ही प्रतिबंधित हो गई हैं।
सुबह 11 बजे से 16 अन्य मार्ग भी वाहनों की आवाजाही के लिए रोक दिए जाएंगे। लेकिन 9 आपातकालीन मार्ग भी बनाये गए हैं, जो किसी अनहोनी में काम आएंगे। एक तरफ बाहर से आने वाले भोले के भक्तों के जत्थे, दुसरी तरफ शाही सवारी का स्थानीय सैलाब। पुलिस-प्रशासन के बंदोबस्त इस हिसाब से ही हो रहे है और उन्होंने श्रद्धालुओं से भी आग्रह किया है कि वे अनुशासन को बनाये रखे। शाम 4 बजे राजा महांकाल मन्दिर प्रांगण से बाहर दस्तक दे देंगे। लेकिन सवारी मार्ग पर उत्सव दोपहर 2 बजे से शुरू हो जाएगा।
रजत पालकी में रहेंगे भगवान चंद्रमौलेश्वर
भगवान महाकालेश्वर शाही सवारी में 7 स्वरूपों में दर्शन देंगे। चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मन महेश, गरूड़ रथ पर शिव तांडव, नंदी रथ पर उमा महेश, डोल रथ पर होळकर स्टेट के घटाटोप मुखारविंद व सप्तम स्वरूप सप्तधान मुखारविंद का होगा। सर्वप्रथम रजत पालक में विराजित चंद्रमौलेश्वर भगवान का पूजन होगा। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। उसके बाद राजा महांकाल प्रजा का हाल जानने सड़को पर निकलेंगे।
पहली बार सिंहस्थ की झांकी होगी शामिल
सवारी में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंशा के अनुरूप पहली बार सिंहस्थ महापर्व की झांकियां भी शामिल की गई है। बीते बरस आदिवासी समाज की कला का प्रदर्शन भी शामिल किया गया है। डिंडोरी का धुलिया जनजाति समुदाय अपने परम्परगत वाद्य यंत्र गुदुम बाजा के साथ लोक नर्तकों सँग प्रस्तुति दी थी। इस बार लोकनृत्य की जगह लोक परम्परा को स्थान दिया गया हैं। सवारी में महाँकाल ध्वज सबकी अगवानी करेगा। उज्जैन सहित अगल बगल के शहर, कस्बों व गांव से 73 भजन मंडलियां भी शामिल होगी।
इसमे इंदौर के गोरकुण्ड की भजन मंडली भी संस्था हिन्द गर्जना के बैनर तले रहेगी। 40 से ज्यादा ढोलक इस दल में रहेंगे। दल की अगुवाई पंडित सत्यनारायण शर्मा ' सत्तू पहलवान' करेंगे। ये दल रात को ही दानी गेट स्थित मोड़ की धर्मशाला में डमरू लेकर मौजूद हो गया हैं। काशी नगरी से आये डमरू ' गोरकुंड अखाड़े' के आकर्षण का केंद्र रहेगा।