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सीईटीआई टीबी हेल्पलाइन : एक फ़ोन पर उपलब्ध हो रहा है टीबी का निशुल्क जांच एवं उपचार

स्वास्थ्य Published by: Sunil paliwal-Anil bagora Updated Tue, 14 Apr 2020 06:12 PM
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● 21 दिन के लॉकडाउन में करीब 300 से ज्यादा मरीजों की समस्या का किया समाधान । 

● प्रतिदिन 15 से 20 कॉल आ रहे CETI टीबी हेल्पलाइन 8989028282 पर । 

● 8989028282 पर कॉल अथवा मिस्ड कॉल करके ले सकते है ज़रूरी सेवाएँ । 

इंदौर । जिले में प्रतिदिन औसतन 32 नए मरीज टी.बी. के विश्व व्यापी कोरोना महामारी की वजह से इंदौर शहर में जो  लॉक डाउन चल रहा है उसको लेकर टीबी मरीजों को बहुत फजीहत हो रही है ऐसे समय में सीईटीआई टीबी हेल्पलाइन की मदद से मरीज को सहायता खासकर दवाइयां उपलब्ध कारवाई जा रही है , जहाँ एक तरफ सारा टीबी विभाग कोरोना के संदिग्धों की स्क्रीनिंग में लगा हुआ है वही मरीज लॉक डाउन में चलते मरीज घरों से नहीं निकल पा रहे है ऐसे समय ये हेल्पलाइन उन मरीजों के लिए बहुत मददगार साबित हो रही है । पिछले कुछ वर्षों से भारत सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अन्य एजेंसियों के सहयोग से उठाए गए कदमों के कारण इससे ग्रसित होने वाले मरीज व होने वाली मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गयी है ।

!●! फाउंडर इन्फोसिस द्वारा टीबी रोगियों को समर्थन देने के लिए शुरू

CETI - कोलेबरेशन टू एलिमिनेट टीबी अमंग इंडियन्स एक सामाजिक संस्थान है जो टीबी मुक्त इंदौर हेतु कृत संकल्पित है जिसकी नींव डॉ सलिल भार्गव एवं डॉ मनोज जैन (अप्रवासी भारतीय वर्तमान में अमेरिका में निवास करते है) ने इस टीबी  हेल्पलाइन 8989028282 को 25 मार्च 2013 को श्री के दिनेश को फाउंडर इन्फोसिस द्वारा इंदौर और आसपास के क्षेत्र में टीबी रोगियों को समर्थन देने के लिए शुरू की गई है, पहले दो वर्षों में इस टीबी हेल्पलाइन को 5 -6  कॉल प्रतिदिन प्राप्त होते थे  परन्तु वर्तमान में प्रतिदिन एक दिन में 15-20 औसत कॉल प्राप्त कर रहे हैं। सरकारी छुट्टियों या किसी भी छुट्टी के दिन रविवार को छोड़कर हम इससे अधिक प्राप्त करते हैं क्योंकि लोग कभी-कभी छुट्टियों के बारे में नहीं जानते हैं या कभी-कभी वे पहले दवा लेना भूल जाते हैं और सरकारी अस्पताल छुट्टियों के दौरान बंद हो जाते हैं उन दिनो में भी संस्था द्वारा विशेष रूप से दवाई उपलब्ध करवाई जाती है ताकि मरीज एक भी दिन दवाई लेने में भूल न करे अन्यथा यदि टीबी का मरीज दवाई लेने में भूल करता है अथवा नागा करता है तो उसे गंभीर वाली टीबी अथवा एम् डी आर टीबी होने का खतरा रहता है । 

!●!  टीबी हेल्पलाइन पर उपलब्ध सुविधाएँ 

● निकटतम सरकारी अस्पताल का पता, करीबी डॉट सेंटर । 

● नि: शुल्क जांच (प्रयोगशाला), सरकार द्वारा मुफ्त इलाज । 

● DOTअथवा टीबी की दवाइयां  लेते समय प्रतिकूल प्रभाव के लिए परामर्श।

● यदि किसी कारण वश  दवा छोड़ दी तो फिर से दवा शुरू करना । 

● दवा लेने का तरीका समझाना । 

● यदि कोई मरीज निजी चिकित्सा प्रणाली छोड़कर सरकारी प्रणाली में निशुल्क उपचार प्रारम्भ करवाना चाहे एमडीआर मामलों की काउंसलिंग । 

● छुट्टियों के दौरान एवं  हड़ताल अथवा आपातकाल के दौरान सेवाएँ उपलब्ध करवाना ।  

● रोगियों के उचित स्थान  दवा और समर्थन नहीं मिल रहा है तो परिस्थितिजन्य सेवाएँ उपलब्ध करवाना । 

● टीबी अधिसूचना के लिए डॉक्टरो को जानकारी प्रदान करना । 

● अन्य टीबी की बीमारी सम्बंधित जानकारी । 

 इंदौर जिले में प्रतिदिन औसतन 32 नए मरीज टी.बी. के जागरूकता के अभाव और टीबी बैक्टीरिया के संक्रमण से टी.बी. रोग के जिले में रोजाना 32 से अधिक मरीज सामने आ रहे है । इनमे कुछ मरीज ऐसे भी है,जिन पर दवाओ का असर नहीं होता या बहुत धीरे धीरे होता है । एक मरीज की खंखार से फैलने वाले बैक्टीरिया से 12 से 15 नए व्यक्ति में बीमारी फ़ैल रही है । यह एक संक्रामक रोग है और मायको बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया से होता है । डॉक्टरों के अनुसार पूर्ण एवं नियमित उपचार लेने से टी.बी. रोग से बचा जा सकता है ।  अधुरा इलाज छोडने पर यह बीमारी भयंकर रूप धारण कर लेती है । सिर्फ सांस लेने में तकलीफ को छोड़कर कोरोना के बाकि सारे लक्षण टीबी जैसे दो सप्ताह से ज्यादा खांसी,बुखार आना, भूख ना लगना, वज़न कम होना कमजोरी, सीने में दर्द होना इत्यादि, बच्चों में भी टीबी आसानी से देखी जाती है यदि बच्चे का वज़न नहीं बढ़ रहा हो, उसे खांसी अथवा सर्दी मणि हुई हो, बार बार डॉ को दिखाने की आवश्यकता पढ़ रही हो टीबी आमतौर पर फेफड़ो में ज्यादा पाई जाती है 

!●! बचाव कैसे करें? 

●  हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को नैपकिन से कवर कर लेना चाहिए।

●  अपनी इम्युनिटी को बढ़िया रखें। न्यूट्रिशन से भरपूर खासकर प्रोटीन डाइट जैसे सोयाबीन,  दालें, मछली, अंडा, पनीर आदि लेनी चाहिए।

●  टीबी का बैक्टीरिया कई बार शरीर में होता है लेकिन अच्छी इम्युनिटी से यह एक्टिव नहीं हो पाता और टीबी नहीं होती।

●  ज्यादा भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। कम रोशनी वाली और गंदी जगहों पर न रहें और वहां जाने से परहेज करें।

● मरीज को हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहना चाहिए।

!●! टीबी एक  वैश्विक महामारी, प्रतिवर्ष लाखों मौते होती है टीबी के कारण

जब हम कोरोना के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा देखते है तो यहाँ यह जानना अति आवश्यक हो जाता है की टीबी से विश्व एवं भारत में प्रतिवर्ष कितने लोगों की मृत्यु होती है टीबी के कारण प्रतिवर्ष पूरे विश्व में करीब 30 लाख मौतें रिपोर्ट की जाती है, तथा कई संक्रामक रोगों की बनिस्बत आज भी क्षय रोग से होने वाली मौतों की संख्या कही ज्यादा है l WHO की माने तो विश्व में प्रतिवर्ष 94 लाख लोग टीबी से ग्रसित होते है, जिनमे से करीब 30 लाख लोगों की मौत टीबी के कारण हो जाती है ।  पिछले वर्ष भी भारत में करीब पौने तीन लाख 2 लाख 80 हज़ार मौतों का आंकड़ा TB के कारण दर्ज किया गया था ।  वैसे तो भारत में प्रभावी भारतीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम (NTEP)  को प्रभावी  बनानें हेतु पिछले कुछ वर्षों से भारत सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अन्य एजेंसियों के सहयोग से उठाए गए कदमों के कारण इससे ग्रसित होने वाले मरीज व होने वाली मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गयी है । टीबी का रोग सिर्फ जानलेवा बीमारी ही नहीं है, बल्कि इलाज में विलम्ब के कारण यह शरीर के महत्वपूर्ण अंग फेफड़ों को नुकसान पहुंचाकर पूरे शरीर को कमजोर करता है तथा बीमारी ठीक होने के बाबजूद उस व्यक्ति की कार्यक्षमता को कम करता है । 

!●! प्रधान मंत्री टीबी को लेकर बहुत ही सजग 

हमारे माननीय प्रधान मंत्री टीबी को लेकर बहुत ही सजग है  उन्होंने टीबी मरीजों के लिए पोषण आहार, चिकित्सकों के लिए इन्सेन्टिव्स, प्रभावी जांचे एवं ऐसी कई योजनाए चला रखी है जिनके चलते मरीज टीबी का इलाज पूर्ण कर रहे है एवं परिवार के लोगो की भी जांच करवाने हेतु जागरूक है । चिंतन का विषय है की यदि इतना सब होने के बाद के बाद भी यदि टीबी के केसेस कम नहीं हो रहे है तो फिर ऐसा क्या किया जाये जिससे टीबी की बीमारी ख़त्म की जा सके । 

!●! ज़रूरत है एक सामूहिक प्रयास की 

ज़रूरत है एक सामूहिक प्रयास की जिसमे समाज के सभी वर्ग समूह, स्वयं सेवी संस्थाएं, समाज का हर व्यक्ति इकठ्ठा होकर सरकार के द्वारा किये जा रहे प्रयासों में सहयोग कर उन हर क्षेत्रों में जहाँ पर महसूस होता है की चिकित्सक अपना सहयोग कर सकते है, हम सबको साथ में मिलकर करना चाहिए जैसे हम आज कोरोना महामारी को दूर करने के लिए कर रहे है । टीबी से सम्बंधित अन्य जानकारी एवम् कोई मरीज यदि टीबी का मुफ्त इलाज प्रारंभ करवाना चाहता है तो सीईटीआई टीबी हेल्प लाईन नम्बर +91 8989028282 पर संपर्क कर सकते है। 

!●! संगीता पाठक  : प्रोग्राम डायरेक्टर सीईटीआई 

मोबाइल - 9826863307, www.tbfree,org

● पालीवाल वाणी ब्यूरो-Sunil Paliwal-Anil Bagora...✍️

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