नई दिल्ली. नकली भारतीय मुद्रा नोटों (FICN) की बरामदगी से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 4 नवंबर 2026 को बड़ी कार्रवाई की। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में संदिग्ध ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, तीनों राज्यों में आठ स्थानों पर छापेमारी की गई।
जांच एजेंसी का उद्देश्य नकली नोटों की आपूर्ति, वितरण और इससे जुड़े संदिग्ध नेटवर्क का पता लगाना है। हालांकि, आठ ठिकानों पर कार्रवाई के संबंध में एनआईए का विस्तृत आधिकारिक बयान अभी उपलब्ध नहीं हुआ है।नकली मुद्रा से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी लगातार जांच का दायरा बढ़ा रही है। विशेष रूप से अंतरराज्यीय संपर्क, संदिग्ध लेनदेन और नोटों की आपूर्ति से संबंधित गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। ताजा कार्रवाई को भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
झारखंड के हजारीबाग जिले में बुधवार तड़के एनआईए की टीम ने दो मकानों में तलाशी अभियान चलाया। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, बड़ा बाजार थाना क्षेत्र के हुरहुरू इलाके में उदय साव और प्रदीप साव के घरों पर जांच टीम पहुंची।बताया गया कि सात सदस्यीय टीम ने सुबह करीब तीन बजे कार्रवाई शुरू की। तलाशी अभियान लगभग सात घंटे तक चला।
इस दौरान दोनों मकानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने भी जांच एजेंसी को आवश्यक सहयोग दिया। सुरक्षा कारणों से तलाशी के दौरान बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही सीमित रखी गई।रिपोर्ट के मुताबिक, टीम कुछ दस्तावेज और एक प्रिंटर अपने साथ ले गई। हालांकि, एनआईए की ओर से इन वस्तुओं की जब्ती की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
नकली नोटों के मामलों में डिजिटल उपकरण जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क तथा लेनदेन संबंधी जानकारी मिलने की संभावना रहती है। हजारीबाग में हुई कार्रवाई के संबंध में भी मोबाइल फोन और प्रिंटर-स्कैनर जैसे उपकरण जांच के दायरे में आने की खबर है।जांच अधिकारियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क किन लोगों से रहे हैं और क्या उनका संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से है।हालांकि, केवल किसी व्यक्ति के घर पर तलाशी होने या कोई उपकरण जांच के लिए ले जाए जाने से उसका अपराध में शामिल होना साबित नहीं होता। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।
बिहार में नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी से जुड़ा एक अलग मामला पहले से एनआईए की जांच के अधीन है। मधुबनी जिले में नेपाल सीमा से नकली नोटों की आपूर्ति के आरोपों को लेकर एजेंसी ने जांच शुरू की थी।यह मामला 2 अगस्त 2026 को मधुबनी के बासोपट्टी थाना क्षेत्र में नकली नोटों की बरामदगी के बाद सामने आया था।
सशस्त्र सीमा बल और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 281 संदिग्ध नकली नोट बरामद किए गए थे। इनका कुल अंकित मूल्य 50,150 रुपये बताया गया था।मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में जांच एनआईए को सौंप दी गई। एजेंसी ने 9 सितंबर 2026 को मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू की थी।
नेपाल से नकली नोट लाने का आरोप मधुबनी से जुड़े मामले में जांच एजेंसी ने भारत महाशेठ और शिव कुमार राउत उर्फ मेहमान के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है।एनआईए के अनुसार, आरोपियों पर नेपाल से नकली भारतीय मुद्रा लाकर स्थानीय बाजारों में चलाने की साजिश में शामिल होने का आरोप है।इस मामले में हीरा महाशेठ उर्फ चाची की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी।
एजेंसी ने बताया था कि संदिग्ध नकली मुद्रा को असली नोटों की तरह बाजार में चलाने की कोशिश की गई।30 अक्टूबर को एनआईए ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पटना की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।इससे पहले 8 अक्टूबर को मधुबनी जिले में 12 स्थानों पर तलाशी ली गई थी। उस कार्रवाई में डिजिटल उपकरण, दस्तावेज, नकदी और अन्य सामग्री मिलने की जानकारी एजेंसी ने दी थी।
पश्चिम बंगाल में भी नकली मुद्रा के नेटवर्क पर नजर पश्चिम बंगाल में नकली नोटों से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में नकली मुद्रा की बरामदगी को लेकर जांच एजेंसियां कार्रवाई कर चुकी हैं।विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े मामलों में नकली नोटों के स्रोत और उनकी आवाजाही की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।एनआईए पहले भी पश्चिम बंगाल में नकली मुद्रा से संबंधित मामलों में तलाशी अभियान चला चुकी है।
एजेंसी के पुराने रिकॉर्ड में कोलकाता में नकली नोटों की बरामदगी से जुड़े एक मामले में दो स्थानों पर तलाशी की जानकारी दर्ज है।ताजा कार्रवाई के संबंध में पश्चिम बंगाल के किन-किन स्थानों पर तलाशी ली गई और वहां से क्या सामग्री मिली, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। नकली नोटों का कारोबार अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती नकली भारतीय मुद्रा का अवैध कारोबार केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं माना जाता। बड़े स्तर पर नकली नोटों का प्रसार बाजार में विश्वास को प्रभावित कर सकता है।ऐसे नेटवर्क की जांच के दौरान एजेंसियां नोटों के स्रोत, उनके परिवहन, वितरण और संबंधित वित्तीय लेनदेन की पड़ताल करती हैं।
नकली नोटों को वास्तविक मुद्रा के रूप में चलाने से आम नागरिकों और व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई बार नकली नोट अनजाने में सामान्य लेनदेन के दौरान लोगों तक पहुंच जाते हैं।इसी कारण जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास करती हैं।नक्शे देखें संदिग्ध संपर्कों और लेनदेन की होगी पड़ताल ताजा छापेमारी के बाद जांच का प्रमुख पहलू यह होगा कि तलाशी के दौरान मिली सामग्री से क्या नए सुराग सामने आते हैं।
यदि डिजिटल उपकरणों से संदिग्ध संपर्कों या वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड मिलता है, तो उससे जांच की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।जांच एजेंसी संबंधित व्यक्तियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बुधवार की कार्रवाई में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है या नहीं।
बरामद सामग्री की कुल मात्रा और अन्य विवरण भी आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होंगे। जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर नजर तीन राज्यों में तलाशी की खबरों के बाद नकली नोटों के नेटवर्क से जुड़े मामले पर ध्यान केंद्रित हो गया है।एनआईए के सामने सबसे बड़ी चुनौती संदिग्ध नकली मुद्रा के स्रोत और उसके वितरण से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करने की होगी। फिलहाल हजारीबाग में हुई तलाशी की जानकारी स्थानीय स्तर पर सामने आई है, जबकि तीनों राज्यों के आठ ठिकानों पर कार्रवाई और उससे संबंधित बरामदगी का पूरा विवरण आधिकारिक बयान के बाद स्पष्ट होगा।