नयी दिल्ली. (भाषा) मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट के बीच अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में नरमी आई। सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल में गिरावट देखी गई।
वहीं मांग बने रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन तथा सोयाबीन के डी-आयल्ड केक ( तेल रहित खल या डीओसी) की मांग होने के बीच सोयाबीन तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।
मलेशिया एक्सचेंज दोपहर लगभग पौने दो प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, शिकॉगो एक्सचेंज में घट-बढ़ चल रहा है। खबर लिखने तक इसमें फिलहाल सुधार था।
सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज टूटने का असर यहां अधिकांश तेल तिलहनों में आई गिरावट के रूप में दिखा। लेकिन मलेशिया में लगभग पौने दो पतिशत की गिरावट थी उसका उतना असर स्थानीय कारोबार पर नहीं आया क्योंकि यहां के आयातक पहले ही लागत से नीचे दाम पर आयातित तेलों की बिकवाली करने में जुटे हैं।
उन्होंने कहा कि सरसों का दाम अधिक है और ऊंचे दाम पर लिवाली कमजोर है। जिससे सरसों तेल-तिलहन में गिरावट आई। लागत से नीचे दाम की बिकवाली जारी रहने से सोयाबीन तेल में भी गिरावट आई। मलेशिया टूटने के असर के कारण पाम-पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम में भी गिरावट आई।
दूसरी ओर, सूरजमुखी के मंहगा होने तथा बिनौले की अनुपलबता के बीच मूंगफली तेल तिलहन की औद्योगिक मांग बनी हुई है। देश में मुर्गीदाने के लिए सोयाबीन के तेल-रहित खल (डीओसी) की भी मांग है। इन कारणों के बीच मूंगफली तेल तिलहन तथा सोयाबीन तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।
भाषा राजेश राजेश रमण