नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी स्थित ईरानी दूतावास ने भारत यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की 'बंधक' टिप्पणी पर सख्त ऐतराज जताया है। एक प्रेस बयान जारी कर उनके दावे को सिरे से खारिज किया है।
बयान विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी साझा किया गया है, जिसके मुताबिक, 'भारत स्थित इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान दूतावास, अमेरिकी विदेश मंत्री की टिप्पणियों को सिरे से खारिज करता है। देश यह स्पष्ट करता है कि ऐसे आरोप क्षेत्र की वास्तविकताओं को तोड़-मरोड़कर पेश करने तथा अमेरिका और इजरायली शासन की अस्थिरता फैलाने वाली नीतियों से ध्यान भटकाने का स्पष्ट प्रयास हैं।'
ईरान ने अपने प्रेस नोट में आगे इसी पर अपनी बात स्पष्ट की। आगे लिखा कि विश्व के प्रमुख तेल और ऊर्जा निर्यातकों में से एक होने के नाते, ईरान हमेशा भारत सहित सभी देशों को अपने ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहा है। हाल के वर्षों में वैश्विक ऊर्जा बाजार को जिस चीज ने बंधक बनाकर रखा है, वह ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिका की ओर से लगाए गए 'अवैध और अन्यायपूर्ण प्रतिबंध' हैं। ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए केवल ईरानी जनता पर आर्थिक दबाव बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं।
दरअसल, 23 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगट ने एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया, 'विदेश मंत्री रूबियो और प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान को वैश्विक ऊर्जा 'बाजार को बंधक' बनाने की इजाजत नहीं देगा, और इस बात की पुष्टि की कि अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों में भारत की ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने की क्षमता है।'