Shripal मामले से कर्मचारियों को क्या उम्मीद?
देशभर में लाखों कच्चे, संविदा, आउटसोर्स और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी वर्षों से एक ही उम्मीद के साथ काम कर रहे हैं कि कभी न कभी उनकी सेवा नियमित होगी। कई कर्मचारी 10–20 साल तक लगातार काम करने के बाद भी अस्थायी कर्मचारी ही बने हुए हैं। कुछ कर्मचारियों के मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित हैं, जबकि कई लोग यह जानना चाहते हैं कि पुराने न्यायिक फैसले उनके लिए कितने उपयोगी हो सकते हैं। ऐसे ही मामलों में Shripal का फैसला हाल के वर्षों में काफी चर्चा में रहा है।
क्या है Shripal मामला?
Shripal & Another बनाम Nagar Nigam, Ghaziabad मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन कर्मचारियों की स्थिति पर विचार किया, जो लंबे समय तक अस्थायी या दैनिक वेतनभोगी के रूप में ऐसे कार्य कर रहे थे, जिनकी प्रकृति स्थायी थी। अदालत ने यह माना कि यदि सरकार या कोई सार्वजनिक निकाय वर्षों तक कर्मचारियों से नियमित प्रकृति का काम लेता रहे और उन्हें लगातार अस्थायी स्थिति में रखे, तो ऐसी स्थिति श्रम न्यायशास्त्र और निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
फैसले में अदालत ने यह स्पष्ट किया कि केवल यह कहकर किसी कर्मचारी के नियमितीकरण के दावे को हमेशा के लिए खारिज नहीं किया जा सकता कि उसकी नियुक्ति अस्थायी थी। यदि नियुक्ति अनियमित (Irregular) थी लेकिन अवैध (Illegal) नहीं थी, कर्मचारी लंबे समय से लगातार काम कर रहा था और उससे स्थायी प्रकृति का कार्य लिया जा रहा था, तो उसके मामले पर कानून के अनुसार निष्पक्ष तरीके से विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि वर्षों तक कर्मचारियों को अस्थायी स्थिति में बनाए रखना उचित नहीं माना जा सकता।
कर्मचारियों के लिए इसका क्या महत्व है?
जो कर्मचारी वर्तमान में नियमितीकरण के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं, वे अपने मामले के तथ्यों के अनुसार Shripal सहित अन्य महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दे सकते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी को स्वतः नियमितीकरण मिल जाएगा। अदालत प्रत्येक मामले में नियुक्ति की प्रक्रिया, स्वीकृत पद, सरकारी नीति, सेवा अवधि और अन्य परिस्थितियों की अलग-अलग जांच करती है। इसलिए अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय ही करेगा।
उक्त जानकारी कर्मचारी हितैषी सुप्रसिद्व अधिवक्ता श्री ओमप्रकाश जी खटके इंदौर, मध्य प्रदेश के माध्यम से पालीवाल वाणी को प्राप्त हुई.
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- डिस्क्लेमर : यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न्यायिक दस्तावेजों पर आधारित है। हम केवल सूचना दे रहे हैं, किसी प्रकार का दावा नहीं कर रहे हैं। प्रत्येक कर्मचारी का मामला उसके तथ्यों, नियुक्ति प्रक्रिया, संबंधित राज्य की नीति तथा न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। यह कानूनी सलाह नहीं है।