बैलगाड़ी में बैठकर बहन के ससुराल भात भरने पहुंचे भाई, ग्रामीण रह गए हैरान

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भीलवाड़ा : राजस्थान के भीलवाड़ा से एक अनोखी तस्वीर सामने आई है. जहां पर भाई अपनी बहन के ससुराल भात भरने उसके ससुराल बैलगाड़ी से पहुंचे. गांव वालों ने भाइयों का जगह-जगह स्वागत किया. लोगों का कहना है कि पुराने जमाने के रीति-रिवाज आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है. लग्जरी गाड़ियों की बजाए सजी-धजी बैलगाड़ियों पर सवार होकर पहुंचे भातियों को देखकर लोग मोबाइल में कैद करने लगे. 

बैलगाड़ियों के पहियों से चर-चर आवाज आ रही थी, नाचते-गाते लोगों ने पुराने दौर को यादों में ताजा कर दिया.  इस दौरान बड़े-बुर्जुगों ने युवाओं को पुराने रीति-रिवाज के बारे में बताया. बहन के ससुराल वालों ने स्वागत-सत्कार में कोई कसर नहीं छोड़ी. रायला के रहने वाले लोकेश वैष्णव की बेटी की शादी में उसके 6 मामा केदार, मुकेश, त्रिलोचन, विनीत, राजू और सत्यनारायण वैष्णव अपनी बहन के ससुराल सजी-धजी 7 बैल गाड़ियों से पहुंचे तो हर कोई देखते रह गया.

भात भरने आए स्कूल अध्यापक सोनू वैष्णव का कहना है कि गांव से 10 किलोमीटर दूर रायला बहन के ससुराल हम बैलगाड़ियों से आए हैं.  ऐसा कर हम लोगों को पेट्रोल और डीजल बचाने के अलावा पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संदेश भी दे रहे हैं. पुराने रीति रिवाज के अनुसार बैल गाड़ियों का प्रचलन बढ़े और हमारी संस्कृति जीवित रहे. ईश्वर लाल ने अपने बेटों की इस पहल का स्वागत किया और कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि बढ़ती महंगाई और  प्रदूषण रोकने के लिए हम बैलगाड़ी से भात भरने आए हैं. संस्कृति को जिंदा रखने के लिए हम सभी को अपना योगदान जरूर देना चाहिए.

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