भूमि या भवन की ढलान (Slope) :
भूमि या छत का ढलान पूर्व (East), उत्तर (North) या ईशान (North-East) दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख, समृद्धि, धन और संतान सुख मिलता है।
- पश्चिम (West) और दक्षिण (South) दिशा की ओर भूमि या छत का ढलान अशुभ होता है। इससे धन हानि, स्वास्थ्य समस्याएं और परिवार में परेशानी आ सकती है।
- दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा में ढलान होना भी अशुभ है, यह गृह स्वामी के लिए नुकसानदायक होता है।
- छत का ढलान भी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर होना चाहिए, ताकि वर्षा का पानी सही दिशा में निकले और वास्तु दोष न बने।
- फर्श या भूमि का ऊंचा भाग दक्षिण और पश्चिम में तथा नीचा भाग उत्तर और पूर्व में होना चाहिए :
- ढलान विपरीत दिशा में हो तो वास्तु उपाय जैसे दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम) में है, तो बिना तोड़फोड़ के कुछ सरल वास्तु उपाय अपनाकर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।
मुख्य वास्तु उपाय : फर्श की ऊंचाई में सुधार : दक्षिण या पश्चिम दिशा में फर्श को ऊंचा और उत्तर या पूर्व दिशा में नीचा करने की कोशिश करें। यदि संभव न हो, तो फर्श पर भारी फर्नीचर या वजनदार वस्तुएं दक्षिण/पश्चिम में रखें, ताकि ऊर्जा का संतुलन बने।
उत्तर-पूर्व (ईशान) को साफ और हल्का रखें : इस कोने में कोई भारी वस्तु, कचरा या मशीन न रखें। यहां कलश, मनी प्लांट या जल पात्र रखें, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
दीवारों का रंग : दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा की दीवारों पर अर्थ कलर रंग (जैसे हल्का पीला या मटमैला भूरा) करवाएं, इससे वास्तु दोष कम होता है।
वास्तु यंत्र या प्रतीक : मुख्य द्वार पर स्वास्तिक यंत्र लगाये इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
क्रिस्टल बॉल्स : अशुभ ढलान वाले हिस्से क्रिस्टल बॉल्स टांगें, जिससे ऊर्जा संतुलित होती है।
कपूर या समुद्री नमक : घर के कोनों में कपूर या समुद्री नमक रखें। इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
दीपक जलाना : दक्षिण-पश्चिम कोने में शाम के समय दीपक जलाएं, जिससे उस दिशा की नकारात्मकता कम होती है।
- विशेष सुझाव : अगर ढलान की समस्या बहुत गंभीर है, तो विशेषज्ञ वास्तुविद से सलाह लेकर फर्श या छत की ऊंचाई में तकनीकी बदलाव (जैसे फॉल्स सीलिंग, मैटिंग, या टाइल्स का उपयोग) भी कराया जा सकता है।
उपरोक्त उपायों को अपनाकर आप बिना तोड़फोड़ के भी विपरीत ढलान के वास्तु दोष को काफी हद तक संतुलित कर सकते हैं :
ऊँकार लब्धि साधना केंद्र : जैन ज्योतिष वास्तु
तेजस गुरूजी- अमदावाद
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● Disclaimer :इस लेख में दी गई ज्योतिष जानकारियां और सूचनाएं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. पालीवाल वाणी इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले इससे संबंधित पंडित ज्योतिषी से संपर्क करें तथा चिकित्सा अथवा अन्य नीजि संबंधित जानकारी के लिए अपने नीजि डॉक्टरों से परार्मश जरूर लीजिए. पालीवाल वाणी तथा पालीवाल वाणी मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है.
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