महादेव अब सावन में तो, खोल दो छुपे भाग्य हमारे।
हमें चाहिए अब मूसलाधार, काफी नहीं हे ये फुहारे।।
महादेव रुद्राभिषेक सहित कई, पाठ हो रहे आके देख।
अंबापुर क्षेत्र का फिर भी कंहा, हो रहा हे जलाभिषेक।।
बाबा को मनाने कर रहे,भक्त जलाभिषेक व पूजा पाठ।
सावन में फिर भी नहीं आ रहा, तेज बरसात का ठाठ।।
फुहारों से क्या होगा केवल, फिर से देखो भोलानाथ।
विनती हमारी बार बार आपसे, जोड़ कर दोनों हाथ।।
प्रभु आषाढ़ के बाद सावन भी, चिंता दे रहा हे बड़ी।
महर करो भगवन लगा दो, अब सावन की जोर जड़ी।।
श्रावणी तीज आ रही प्रभु, आमेट से ना करो अन्याय।
उजाला करे विनती,बरसा के पानी कर दो अब न्याय।।
सम्पत उजाला पत्रकार
बोईसर मुंबई कवि आमेट मेवाड़