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आदमी री सरंचणा-कांदा--प्याज : राजेन्द्र सनाढ्य राजन

आपकी कलम Published by: राजेन्द्र सनाढ्य राजन Updated Sun, 11 Jan 2026 03:23 AM
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आदमी री सरंचणा, 

हुबहू कांदा जसी वेवें

परतां ऊपरे परतां

परतां ऊपरे परतां

उकालता रो,उकालता रो

उकालता रो,उकालता रो

दोई आँखां घणी बळे

रे- रेन आँसूं भी आवें

पण आप रूकों मत

परतां उकालता रो

नराई वेन्डा भी केई

नराई हँसता भी रेई

पण खुद ने विसवास हैं

मीने क ई न क ई तो हैं

आखिर मेनत रंग लाई 

मीनु एक बच्चों निकळे ला

मीठों गट्ट न धोळों फट्ट

राजन आई तो आतमा हैं

परम पिता परमातमा हैं

पण आदमी हवारथ मा, 

कांदा ने चकु ऊँ काटी नाके

के पछे मुक्कों मेली नाके

कांदा रो कचूमर निकळी जा, 

बच्चों हवा मा उड़ी जा

बच्चों हवा मा उड़ी जा।। 

कांदा--प्याज। 

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● राजेन्द्र सनाढ्य राजन

वाइस प्रिंसिपल, रा उ मा वि नमाना

नि-कोठारिया, जि-राजसमंद, राजस्थान)

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