मेवाड़ी मनख : राजेन्द्र सनाढ्य राजन

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मुंडा पे मूँछा राखा, 

म्हाँ तीखी भलक,

सवाभिमानी पूरा हा, 

जाणें पूरो मलक। 

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आँखा मा तेज राखा, 

खुली राखा पलक, 

कोई थौड़ों टेढ़ों पडें, 

वताई दा विने झलक। 

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हाथा मा दम राखा, 

काम री राखा ललक, 

कंडी हामें नी करां, 

म्हां गळक-गळक। 

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घट मा दया राखा, 

ऊपरूं राखा धमक, 

वफादारी पूरी करां, 

जंडों खावां नमक। 

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पगा मा मजबूती राखा, 

चाल राखा गमक, 

पाछे पग नी मेला, 

दुनियाँ जावों पटक। 

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जबान मा मीठास राखा, 

तर राखा हलक, 

भगवान रो नाम ला, 

चौईसी घंटा तलक। 

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राजन म्हां मेवाड़ी, 

मनख हा मनख, 

चावों जदी कर लीज्यों,

थाँ म्हाणी परख। 

थाँ म्हाणी परख।।

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राजेन्द्र सनाढ्य राजन : वाइस प्रिंसिपल

रा उ मा वि नमाना, नि- कोठारिया, जि-राजसमंद. राजस्थान

  • रचणां नं- 4430
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