राजेन्द्र सनाढ्य राजन : वाइस प्रिंसिपल
अबास्यां खाई-खाई न,
रे-रेन बाकों फाड़ी रा,
आँखाई पूरी नी खुली री,
मचक-मचक करी रा।
केवें-विवेकानंद वणा ला।।
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मुंडा पे देखें तो,
माखाई माखा पड़ी रा,
मांदेल जानवर जूँ,
ऊँघें जूँ ऊँघी रा।
केवें-विवेकानंद वणा ला।
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ऊबा ई नी रेई सके,
दड़क- दड़क पड़ी रा,
हाथ- पगा मा दम ई नी,
फूँक दो तो उड़ी रा।
केवें-विवेकानंद वणा ला।।
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आकोदन चौत्तर्या घसे,
केई घंटा कम पड़ी रा,
भणाई तो खूँटी पे टेरी,
गुरू पे आँखा काडी रा।
केवें-विवेकानंद वणा ला।।
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माँ- बाप ई परेसाण,
रात-दन छाती कूटी रा,
क ई केई नी सके बिचारा,
तू-तड़ाका ऊं वातं करी रा।
केवें-विवेकानंद वणा ला।।
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पेली खुद ने तपाई लो,
पछे सब वणों विवेकानन्द,
राजन ने घणी खुसी वैई,
देस मा वैई आनंद ई आनंद।
केवें-विवेकानंद वणा ला।।
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