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आप वणों विवेकानंद : राजेन्द्र सनाढ्य राजन

आपकी कलम Published by: paliwalwani Updated Sat, 17 Jan 2026 12:03 AM
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राजेन्द्र सनाढ्य राजन : वाइस प्रिंसिपल

अबास्यां खाई-खाई न, 

रे-रेन बाकों फाड़ी रा, 

आँखाई पूरी नी खुली री, 

मचक-मचक करी रा। 

केवें-विवेकानंद वणा ला।। 

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मुंडा पे देखें तो, 

माखाई माखा पड़ी रा, 

मांदेल जानवर जूँ, 

ऊँघें जूँ ऊँघी रा। 

केवें-विवेकानंद वणा ला। 

♾️♾️♾️♾️♾️♾️

ऊबा ई नी रेई सके, 

दड़क- दड़क पड़ी रा, 

हाथ- पगा मा दम ई नी, 

फूँक दो तो उड़ी रा। 

केवें-विवेकानंद वणा ला।। 

♾️♾️♾️♾️♾️♾️

आकोदन चौत्तर्या घसे, 

केई घंटा कम पड़ी रा, 

भणाई तो खूँटी पे टेरी, 

गुरू पे आँखा काडी रा। 

केवें-विवेकानंद वणा ला।। 

♾️♾️♾️♾️♾️♾️

माँ- बाप ई परेसाण,

रात-दन छाती कूटी रा, 

क ई केई नी सके बिचारा, 

तू-तड़ाका ऊं वातं करी रा। 

केवें-विवेकानंद वणा ला।। 

♾️♾️♾️♾️♾️♾️

पेली खुद ने तपाई लो, 

पछे सब वणों विवेकानन्द, 

राजन ने घणी खुसी वैई, 

देस मा वैई आनंद ई आनंद। 

केवें-विवेकानंद वणा ला।। 

♾️♾️♾️♾️♾️♾️

  • रा उ मा वि नमाना नि-कोठारिया, राजसमंद, राजस्थान
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