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इंदौर / ब्रह्मलीन श्री जगदीश जी पुरोहित (दरबार) का नुरानी चेहरा आज भी याद आ रहा है...क्यों चले गए इतनी जल्दी...

ब्रह्मलीन श्री जगदीश जी पुरोहित (दरबार) का नुरानी चेहरा आज भी याद आ रहा है...क्यों चले गए इतनी जल्दी...
Pulkit Purohit - Vishal Purohit August 21, 2020 03:58 PM IST

इंदौर । पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी इंदौर खटामला के समाजोत्थान की प्रज्वलित ज्योति ब्रह्मलीन श्री जगदीश पिता  गिरधारीलाल जी पुरोहित (दरबार ) का आज जन्मोत्सव उनके ना रहने के बावजूद परिजनों एवं समाज में उनके द्वारा स्थापित कार्यकर्ता की ओर से मनाया जा रहा हैं। आप का नाम आते ही लोग बोल उठते थे कि दरबार अब संजने वाला हैं। जब भी दरबार जिससे मिलते थे उनको अपना दरबारी बना लेते थे। बहुत ही मिलनसार, मदृभाषी, हंसमुख के धनी ब्रह्मलीन श्री जगदीश पुरोहित (दरबार) का नाम आज भी आते ही मानो ऐसा अहसास हो जाता है कि दरबार अब लगने वाली हैं। उनके चाहने वालों की लंबी फेहरिस्त है। सभी जनों की ओर से उनके जन्मोत्सव पर याद कर...हमारी आंखे आज भी नम है। 

वीरों की भूमि मेवाड़ की धरती गांव खटामला के वरिष्ठ समाजसेवी, पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी इंदौर के पूर्व कार्यकारणी सदस्य ब्रह्मलीन गिरधारीलाल जी पुरोहित की धर्मपत्नी ममतामयी श्रीमती मगनीदेवी पुरोहित की पावन कोख से जन्म लेकर प्राप्त स्मरणीय लोकमाता माँ अहिल्या देवी की पावन धरती इंदौर पूर्वी क्षेत्र में अपनी कर्म स्थली बनाने वाले एक गौर वर्ग, हष्टपुष्ट व्यक्तित्व, आँखों के सामने आ जाते है। सदा मुस्कुराते और मघुर वाणी से जनमानस के दुख तकलीफों में उनसे सहयोग करने की अदभूत क्षमता के धनी जिन्हे ंबोलचाल और स्नेह से हर व्यक्ति (दरबार ) के नाम से जानता और पहचानता स्थापित नाम था। श्रीचारभुजानाथ जी, श्रीहनुमान जी के देवालय के विनम्र साधक सेवक धर्म साधना के साथ ही समाज कल्याण परमार्थ में भी सदा अग्रिम पथ पर चलने वाले व्यक्तित्व के महान सपूत थे। आपका जीवन धार्मिक, सुचिता, समृद्धशाली तथा सामाजिक श्रेष्ठता एंव स्पन्दित मंगलोन्मुखी समाज की कल्याणी सृष्टि के कुशल संवाहक व कठोर शिल्पी के रुप में समर्पित दरबार स्वयं एक व्यक्ति के रुप में उपयोगी संस्था के समान थे। 12 अगस्त 1959 को जन्मे आज 61 वीं. जयंती पर उनसे प्राप्त शिक्षा ,संस्कार, स्नेह, सहयोग एंव मार्गदर्शक नि:शब्दों में अभिव्यक्ति नही कर सकते पर यह जरूर कह सकते है कि वे हमारी जीवित पाठशाला थे...वे ही हमारे गुरुत्व थे...वे ही हमारी खुल्ली पुस्तक थी....वे ही हमारे इम्तंहान और परिणाम थे...अभी हमारी सीखने की गुरु शिक्षा पूरी भी नही हुई थी कि वे हमें बिना साहरे के छोड़...स्वर्ण लोक की प्रस्थान कर गए हो...लेकिन आज भी हमारे दिलों में सदा दरबार की तरहा संजते रहते थे...दरबार, जो भी सिखा गये वो इस दुनियादारी, त्याग तपस्या सेवा के किसी भी मंच पर अजेय रहने का महामंत्र देकर गये। आज उनके पदचिन्हों पर चलकर उनके सपनों को साकार करने में हम भी किसी से पीछे नहीं हो रहे है, जब भी आपका चेहरा हमारे सपनों में आता है, उस दिन समाज में नया मुकाम और कुछ करने की तमन्ना की अलख जगाती रहती है, सदैव आपके ऋृणी रहेगे...जो आपने सिखाया वो सत्य की राह पर हमेशा चलते रहेगे। मुश्किल कितनी भी आए...आपके तपोभूमि से हमेशा खरे उतरने का प्रयास करते रहेगे। ब्रह्मलीन श्री जगदीश पुरोहित (दरबार) की जीवनयात्रा के संदर्भ में यही कहां जा सकता है कि जीवन जमीन पर जन्म लेता है. जीने की कला. कर्म की वेदी, समाज का पथ प्रर्दशक, सेवा, त्याग समाजोत्थान के मार्ग बताने वाला जमी और दिलो मे ंहमेशा अमर बनकर छाया रहता हैं, .वह पीढ़ी दर पीढ़ी तक जीवित रहकर प्रेरणा का पुष्प हमेशा दुसरों के लिए समर्पित रहता है, और हमेशा रहता आयेगा। समाज सेवा के क्षैत्र में मुझे लाने का श्रेय भी परम आदरणीय श्रद्बेय जीयाजी श्री जगदीश जी पुरोहित (दरबार) को ही जाता है और उनकी प्रेरणास्त्रोत्र यादों के रुप में सदा स्मरणीय और अमर रहेगी। उनकी यादें और उनके बताए गए आदर्श की विचारधारा हम सबके बीच समाजोत्थान के लिए काम करती रहेगा। 

सुरेश भोलीराम जी दवे-बामन टुंकड़ा

पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी कार्यकारिणी सदस्य एवं पालीवाल गौरव पत्रिका संपादक

● पालीवाल वाणी ब्यूरो-Pulkit Purohit - Vishal Purohit...✍️

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