मध्य प्रदेश सरकार पर बढ़ा कर्ज का बोझ : "लाड़ली बहना बनी जी का जंजाल"
भोपाल. मध्य प्रदेश में विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे को तेज गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन कर रही है। अपने संसाधनों के साथ-साथ बाजार से कर्ज लेने के क्रम में सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से 4,500 करोड़ रुपये का नया ऋण लिया है। इस नए ऋण के जुड़ने के बाद प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 5 लाख 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान सरकार सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुपात में विकास योजनाओं के लिए कर्ज ले रही है। दिसंबर तक बाजार ऋण की स्वीकृत सीमा के तहत, 19 अक्टूबर 2026 को तीन अलग-अलग हिस्सों में लिए गए 4,500 करोड़ रुपये को मिलाकर इस वित्तीय वर्ष में अब तक कुल 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है।
"लाड़ली बहना बनी जी का जंजाल"
"लाड़ली बहना बनी जी का जंजाल" यह कहावत या तंज हाल ही में मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर राज्य सरकार के मंत्रियों के बीच पैदा हुए विरोधाभास और राजनीतिक घमासान के संदर्भ में चर्चा में आया है।
राज्य सरकार लगातार वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन
मध्य प्रदेश में विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे को तेज गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन कर रही है। अपने संसाधनों के साथ-साथ बाजार से कर्ज लेने के क्रम में सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से 4,500 करोड़ रुपये का नया ऋण लिया है। इस नए ऋण के जुड़ने के बाद प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 5 लाख 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान सरकार सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुपात में विकास योजनाओं के लिए कर्ज ले रही है। दिसंबर तक बाजार ऋण की स्वीकृत सीमा के तहत, 19 अक्टूबर को तीन अलग-अलग हिस्सों में लिए गए 4,500 करोड़ रुपये को मिलाकर इस वित्तीय वर्ष में अब तक कुल 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है।
मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर बाजार से 3,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है। यह राशि दो हिस्सों में जुटाई गई है, जिसे 18 साल और 30 साल की अवधि में चुकाया जाएगा। इस नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में सरकार का कुल कर्ज 17,400 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर करीब 5.61 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है।
पैसा बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के जरिए जुटाया
वित्त विभाग के अनुसार, यह पैसा बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के जरिए जुटाया गया है। सरकार इस राशि का उपयोग सिंचाई, सड़क, ऊर्जा, पेयजल, कृषि और अन्य विकास कार्यों में करेगी। इस कर्ज के लिए केंद्र सरकार से भी मंजूरी ली गई है।
सरकार का कहना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति संतुलित है और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए यह उधारी ली गई है। वहीं, इस बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष सरकार को घेर सकता है, जबकि सरकार का दावा है कि राज्य की परिसंपत्तियां उसकी कुल देनदारियों से अधिक हैं।
विपक्ष का रुख : विपक्षी पार्टियों ने बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि इस उधारी का एक बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने और फिजूलखर्ची में जा रहा है, जिससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
बजट और वित्तीय बोझ
सरकार हर महीने 41वीं किस्त के रूप में ₹1500 प्रति महिला ट्रांसफर कर रही है, जिससे राज्य की तिजोरी पर बड़ा वित्तीय भार है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। नए नाम जुड़ने से यह खर्च और बढ़ेगा, जो कि सरकार के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती है।
नए रजिस्ट्रेशन या पोर्टल खुलने की कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं
सरकार फिलहाल छूटी हुई महिलाओं का आकलन करवा रही है, लेकिन नए रजिस्ट्रेशन या पोर्टल खुलने की कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं की गई है। वर्तमान लाभार्थियों को हर महीने की तरह राशि ट्रांसफर की जा रही है।
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