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स्मृतियां शेष : पालीवाल समाज में अदभूत रहे समाजसेवी पंडित श्री रघुनाथ जी पालीवाल ने स्थापित की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

नाथद्वारा Published by: Devakishan paliwal-Narendra Paliwal Updated Tue, 28 Jul 2020 12:54 AM
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नाथद्वारा । पालीवाल ब्राह्मण समाज 24 श्रेणी नाथद्वारा अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कवि श्री गिरीश पालीवाल (विद्रोही) ने अपनी कलम से एक अदभूत तस्वीर आज की पीढ़ी के समाने रखी जो ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि एक इतिहास का पन्ना हमारे समाने पढ़ने और सोचने पर मजबूर कर दिया कि पालीवाल समाज का इतिहास बलिदानों से भी भरा पड़ा है, कई संघर्षो के बाद हम खुली सांसे ऐसे वीरों के कारण ही ले पा रहे है। राष्ट्रीय कवि श्री गिरीश पालीवाल (विद्रोही) ने अपनी कलम से पालीवाल वाणी के माध्यम से अपनी बात कही। आप सभी के पिताश्री को प्रणाम करते हुए अपने पिताश्री की स्मृतियों को मित्रों तक पहुंचाता हूं। वे जीवन भर खादी पहनते रहे, सच्चे गांधीवादी रहे। हल्दी घाटी खमनोर के सत्रह वर्ष पंचायत समिति के प्रधान रहे। नगरपालिका नाथद्वारा के चेयरमेन रहे। हल्दीघाटी खमनोर के प्रधान रहते हुए मेला प्रारंभ किया। आजादी की लडाई में प्रजामंडल के प्रथम पंक्ति के सिपाही रहते हुए कितनी बार जेल गए, विशेष कर नो माह तक कुंभलगढ जेल में रहे। वे ऊँचे दर्जे के पत्रकार कवि साहित्यकार। समाज के कितनी ही बार अध्यक्ष रहे। आजादी के गीत लोगों के कंधों पर बैठकर गाते थे सभी के शाश्वत फ़ोटोग्राफ हैं जो आगे शेयर करूंगा। बहुत संघर्ष मय जीवन रहा। अपने विरोधियों के प्रति भी कड़वाहट नहीं रखी। उनके चार पुत्र। सबसे बडे नाथद्वारा के विधायक और राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक कवि गीतकार स्वर्गीय श्री नवनीत कुमार जी पालीवाल। दूसरे लेबर के उदयपुर के यशस्वी वकील एवं साहित्यकार श्री प्रदीप कुमार जी पालीवाल। तीसरे पत्रकार लेखक पूर्व पार्षद संपादक श्री महेश जी पालीवाल। महत्वपूर्ण कार्यो में संलग्न रहे। सबसे छोटा मैं खेल कविता और अल्प समय के लिए राजनीति से जुडा। नाथद्वारा से प्रतिनिधित्व करते हुए जूनियर वालीबाल का राष्ट्रीय खिलाड़ी अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के कवि और संचालक के रूप में भारत के अठारा प्रांतों में सम्मिलित हुआ। राष्ट्रीय कवि श्री गिरीश पालीवाल (विद्रोही)। पूर्व प्रधानमंत्री जी द्वारा सम्मानित हुआ। सम्मान उपलब्धिया बहुत है पर यह सभी माता पिता का आशीर्वाद है। तीन बहने रमाजी, जयाजी, नीरजा अध्यापिका रही। फिर कभी और जयश्री कृष्ण। संक्षेप विवरण केवल यादों के पन्नों के बाहर निकलकर आप तक एक बार फिर उन वीरों की तस्वीर आप तक पहुंचाने का मकसद केवल इतना सा है कि आज की युवा  पीढ़ी त्याग, संघर्षों और समाजसेवा के सिद्वांतों को भूल चुकी है। उन्हें केवल याद दिलाने का प्रयास करना और उनके बताएं गए पदचिन्हों पर चलने का छोटा सा प्रयास करने का दायित्व आप सबका है। जयश्री कृष्णा

● पालीवाल वाणी ब्यूरो-Devakishan paliwal-Narendra Paliwal...✍️

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