वाणी का वशीकरण

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  • मनुष्य के पास संसार को जीतने के लिए न धन आवश्यक है, न पद और न ही कोई विशेष सामर्थ्य। यदि उसके शब्दों में प्रेम, विनम्रता और मिठास है, तो वह अनजान हृदय में भी अपना स्थान बना सकता है।

हमारी जुबान की मिठास हमें विश्व-मित्र बना सकती है, और कठोर वाणी अपने ही लोगों को हमसे दूर कर सकती है। इसलिए कहा गया है—

“वाणी सबसे बड़ा वशीकरण है।”

मधुर बोलने का अर्थ यह नहीं कि हम हर बात में सहमत हो जाएँ। सत्य बोलना भी आवश्यक है, लेकिन सत्य को किस भाव और किस शब्द में कहा जाए, यही हमारी संस्कारशीलता की पहचान है।

एक ही बात को दो व्यक्ति कह सकते हैं—

एक की वाणी सामने वाले के हृदय में चोट कर देती है,

और दूसरे की वही बात उसके जीवन को बदलने की प्रेरणा बन जाती है।

अतः बोलने से पहले एक क्षण ठहरिए और स्वयं से पूछिए—

क्या मेरे शब्द किसी के हृदय को तोड़ेंगे या जोड़ेंगे?

क्या मेरी वाणी अहंकार बढ़ाएगी या प्रेम?

क्या मेरे शब्द किसी को निराश करेंगे या जीवन में आशा जगाएँगे?

याद रखिए, घाव शरीर पर हो तो समय के साथ भर जाता है, लेकिन कठोर शब्दों का घाव कभी-कभी वर्षों तक हृदय में बना रहता है।

इसलिए वाणी में मिठास रखिए, व्यवहार में विनम्रता रखिए और हृदय में प्रेम रखिए।

आप पाएँगे कि बिना किसी स्वार्थ के लोग आपके पास बैठना चाहेंगे, आपकी बात सुनना चाहेंगे और आपके साथ अपने मन की बातें साझा करना चाहेंगे।

धन से खरीदे हुए संबंध समय के साथ बदल सकते हैं,

लेकिन प्रेम से जीते हुए हृदय जीवनभर साथ रहते हैं।

आइए, आज से संकल्प लें—

हमारी जुबान से किसी के हृदय को पीड़ा न पहुँचे।

हमारे शब्दों से टूटे हुए मन को सहारा मिले।

हमारी वाणी में सत्य हो, पर सत्य के साथ करुणा भी हो।

क्योंकि सुंदर चेहरा कुछ समय के लिए आकर्षित करता है,

धन कुछ समय के लिए प्रभावित करता है,

लेकिन मधुर वाणी और प्रेमपूर्ण व्यवहार मनुष्य को जीवनभर यादगार बना देते हैं।

वाणी को मधुर बनाइए,

हृदयों को जीतिए और प्रेम को अपना सबसे बड़ा परिचय बनाइए। 

।। जय श्री राम ।।

आचार्य विजयेन्द्र त्रिवेदी

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