इंदौर में 5 हजार सफाईकर्मियों की हड़ताल से चरमराई व्यवस्था : नेताओं को हजम नहीं हो रही हैं, हड़ताल

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इंदौर. 

इंदौर नंबर बना हुआ है, लेकिन अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है, खुद तो घरों में बैठे है, ओर हजारों रूपए का वेतन मस्टरकर्मचारियों की मेहनत का ले रहे है, जो वास्तव में सफाई की व्यवस्था में हमेशा सुख हो या दुःख हमेशा सड़कों पर रहकर सफाई में निरंतर नंबर वन बनाएं रखने के बाद भी 15 सालों से कर्मचारीयों का दोहन करते हुए 10 हजार की पगार देकर इतिश्री कर रहे है, मंहगाई के दौर में घर चलना दुश्वर हो चुका है.

कई मस्टर कर्मचारियों के बच्चे स्कुल नहीं जा पा रहे है, समय पर बच्चों को बीमर होने के बाद भी समुचित इलाज नहीं करा पा रहे है...उसके बाद सर्दी हो गर्मी या बरसात हमेशा अपनी जान जोखिम में डालकर इंदौर को नंबर वन बनाने में अपनी जान झोख दी. लेनिक कुछ नेताओं कीे हड़ताल से दुकान बंद होते हुए दिखाई दी तो उच्चस्तर पर मीटिंग में हड़ताल से मुंह मोड़ लिया...जबकि हड़ताल करने वाले भी इसी परिवार से आते है...कई युनियन होने के बाद भी 15 सालों से सफाईकर्मियों की एक भी मांग पूरी ना कर सके...जो कर्मचारियों के हित में मैदान में लड़ाई लड़ रहा है, वो अपना हक मांग रहा है, लेकिन दुकान बंद होने का खतरा देखते हुए साफ-साफ मना कर इंदौर की शान में कशीदें गढ़ रहे हैं. इनको यह नहीं भुलना चाहिए...कि आप लोगों ने भी निरंतर ज्ञापन सौंपे उनका निराकरण तक नहीं करा सके...हड़ताल सफल ना हो, इसके लिए प्रशासक कोरे आश्वासन दे रहा है, जो ना काफी हैं. 

निरंतर सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर अब सड़कों और कॉलोनियों में साफ दिखाई देने लगा हैं. बीते तीन दिनों से जगह-जगह कचरे के ढेर जमा हैं और सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. निगम प्रशासन के सारे दावे फैल हो गए...अब तो सड़को ंपर गुजरों तो सांडस की बू आ रही हैं. तत्काल सफाईकर्मियों की मांग मनाते हुए...इंदौर की जनता को राहत पहुंचाएं.

5000 (पांच हजार) से ज्यादा सफाईकर्मियों की हड़ताल के चलते सड़कों से कचरा नहीं उठ पा रहा है. हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में रहवासी खाली प्लॉटों और खुले स्थानों पर कचरा फेंकने को मजबूर हो रहे हैं.

अपनी मांगें पूरी नहीं होने के विरोध में शहर के पांच हजार से ज्यादा सफाईकर्मी 5 अक्टूबर 2026 से हड़ताल पर हैं. इसके कारण घरों से लेकर प्रमुख बाजारों तक कचरा संग्रहण और सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है.

साजन नगर, पालदा, गोविंद नगर, पलासिया क्षेत्र, सोमनाथ की चाल, नेहरू नगर, ओल्ड पलासिया, संविद नगर, नंदानगर, परदेशी पुरा, बाणगंगा और अन्नपूर्णा, कई निगम जोन कार्यलाय पर भी गंदगी के ढेर दिखाई दिए. इसके अलावा कई इलाकों में सफाई नहीं होने से कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं.

बाजारों में भी नहीं उठा कचरा, दुकानदार परेशान: तीज त्यौहार पर शहर के प्रमुख बाजारों में भी तीन दिनों से कचरा नहीं उठने के कारण दुकानदारों की परेशानी बढ़ गई हैं. कचरा दुकानों में ही रखना पड़ रहा है. जो बदबू मारने लग गया है, लोगो को शंका है कि अगर हड़ताल जल्दी समाप्त नहीं होती है, तो गंभीर बीमारी की आशंका निर्मित हो जाएगी.

वहीं, जिन इलाकों में सफाईकर्मी रहते हैं, उनके आसपास की कॉलोनियों में भी ज्यादा कचरा दिखाई दे रहा हैं. सड़कों पर कचरा फेंके जाने से सफाई व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई हैं.

इंदौर में 500 से ज्यादा कचरा वाहन रोजाना घर-घर पहुंचकर करीब 800 टन कचरा एकत्र करते हैं. हड़ताल के कारण ज्यादातर इलाकों में ये वाहन नहीं पहुंच पाए. घरों में दो दिनों तक कचरा जमा रहने से परेशान रहवासियों ने इसे आसपास के खाली प्लॉटों और खुले स्थानों पर फेंकना शुरू कर दिया.

वहीं, पेड़ों की पत्तियों का कचरा भी हवा के साथ उड़कर सड़कों पर फैलता रहा. इससे शहर के कई इलाकों में गंदगी दिखाई देने लगी है.

हड़ताल खत्म कराने के प्रयास जारी, अब तक नहीं निकला हल: सफाईकर्मियों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए जनप्रतिनिधियों ने भी प्रयास शुरू किए हैं. हालांकि, अब तक कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकल पाया है. हड़ताल जारी रहने से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित बनी हुई है और जगह-जगह जमा कचरा परेशानी बढ़ा रहा हैं.

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