Pradeep Joshi
इंदौर.
डिजिटलाइजेश और सोशल मीडिया के दौर में भी लेखन जैसा सृजनात्मक कार्य पूरे उत्साह से जारी है. खुशी की बात ये है कि अब काव्य, लघु कथा, कहानियां के लेखन में युवा और नए लेखकों की ना सिर्फ तादाद बढ़ रही है बल्कि उनकी पुस्तकों का प्रकाशन भी हो रहा है.
इन्हीं नव लेखकों में शामिल है सुश्री नीरजा जैन जिनका कहानी संग्रह कभी_धूप कभी_छाँव का हाल ही में विमोचन हुआ. हमारी बिरादरी यानि पत्रकारिता से ताल्लुक रखने वाली नीरजा जी अब साहित्य जगत का हिस्सा है ये गौरव की बात है। नीरजा जी ने अपनी पहली पुस्तक की प्रति इंदौर प्रेस क्लब को भेट की...
बड़ी सुंदर बात उन्होंने कही कि कुछ कहानियां हम लिखते नहीं, अपने आप हमारे भीतर आकर लेती रहती है, कोई विचार आया, किसी घटना ने छुआ, किसी रिश्ते ने कुछ कह दिया, जीवन के किसी छोटे से अनुभव भीतर हलचल पैदा की...
बस इन्हीं सबको मैने पन्नों पर उतार दिया, देखते ही देखते यह सिलसिला इक्यावन कहानियों तक आ पहुंचा... जो एक कहानी संग्रह के रूप में अब सामने है. नीरजा जी आपका उत्कृष्ट लेखन सफलता की ऊंचाइयों को छूए यही शुभकामनाएं है.
हार्दिक बधाई : इस मौके पर हमारे मार्गदर्शक एवं पूर्व अध्यक्ष अरविंद तिवारी जी, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र कोपरगाँवकर, डॉ. अर्पण जैन 'अविचल', लक्ष्मीकान्त पंडित, प्रदीप जोशी "समय जगत", लोकेश पाल, अशोक गौड़ विशेष रूप से मौजूद रहें.