बरसात के मौसम में डेंगू एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) नामक मच्छर के काटने से फैलने वाली एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो आमतौर पर दिन के समय साफ और रुके हुए पानी में पनपती है। मानसून के दौरान नमी और तापमान बढ़ने से इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डेंगू के मुख्य लक्षणअचानक तेज बुखार आना।जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द (इसे 'हड्डी तोड़ बुखार' भी कहा जाता है)।आँखों के पीछे दर्द होना।त्वचा पर लाल चकत्ते (रैश) आना।अत्यधिक कमजोरी और जी मिचलाना।प्लेटलेट्स (Platelets) का तेजी से कम होना।
गर्मियों में जगह-जगह भरे पानी में मच्छर पनपने की वजह से डेंगू का जोखिम बढ़ जाता है। इसमें व्यक्ति को शरीर में दर्द, सिर दर्द, त्वचा पर चकत्ते, कमजोरी और आंखों के पीछे दर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह उल्टी, ब्लीडिंग और पेट में दर्द का कारण बन सकता है। ऐसे में आप डेंगू से बचने के लिए कुछ सावधानियों को अपना सकते हैं।
गर्मियों के दिनों में जगह-जगह भरे पानी में मच्छर पनपने की वजह से डेंगू और अन्य बीमारियों का संक्रमण बढ़ जाता है। डेंगू एक वायरल रोग है, जो संक्रमित एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के काटने से फैलती है। इसमें व्यक्ति के प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से कम होने लगता है। साथ ही, इसमें तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिसकी वजह से उनको डेंगू होने का जोखिम भी अधिक होता है।
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि समय पर सावधानी बरतने से डेंगू के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने विश्व के 97 देशों से जनवरी से जुलाई 2025 तक डेंगू के करीब 4 मिलियन से अधिक मामले और 3000 से अधिक मौतें दर्ज की थी। यह आंकड़े बताते हैं कि डेंगू को अनदेखा करना आपके लिए घातक साबित हो सकता है।
डेंगू एक तरह का वायरल इंफेक्शन है, जो डेंगू वायरस के कारण होता है। यह वायरस संक्रमित मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता है। डेंगू का कारण बनने वाले एडीज मच्छर रात की जगह सुबह और शाम के समय काटते हैं। हर साल दुनियाभर के लाखों लोग डेंगू की चपेट में आ जाते हैं। अगर समय पर डेंगू के मरीज को इलाज न मिले, तो यह डेंगू हेमरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
सीडीसी के अनुसार डेंगू के लक्षण संक्रमित मच्छर द्वारा व्यक्ति को काटने के बाद करीब दो सप्ताह के समय तक लक्षण समाने आ सकते हैं। शुरुआत में यह सामान्य बुखार जैसा लग सकता है, लेकिन कुछ संकेतों जैसे बार-बार उल्टी होना, लगातार कमजोरी महसूस होना और जोड़ों में तेज दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मच्छर साफ और रुके हुए पानी में तेजी से पनपते हैं। इसलिए डेंगू से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। इसके लिए आप कूलर का पानी समय-समय पर बदलते रहें। गमलों और उनकी ट्रे में जमा पानी को खाली करना न भूलें, घर पर रखे पुराने टायर में पानी इकट्ठा न होने दें, डिब्बे व बोतलें खुली न रखें, छत पर रखी पानी की टंकियों को ढककर रखें। यह आदत घर के आसपास मच्छरों के पनपने की प्रक्रिया को रोक सकती है।
क्लिवलैंड क्लीनिक के अनुसार डेंगू से बचने के लिए आप घरों के गेट व खिड़कियों में जाल लगाएं। इसके लिए आप खिड़कियों पर मच्छरों को रोकने वाला नेट भी लगा सकते हैं। दरवाजें ज्यादातर समय बंद रखें। बच्चों और बुजुर्गों के कमरों में अतिरिक्त सुरक्षा रखें। आवश्यकता हो तो इलेक्ट्रिक रैकेट या मशीन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
आज के समय में बाजार में कई तरह की क्रीम और स्प्रे उपलब्ध हैं, जो आपको मच्छरों से सुरक्षित रखने का दावा करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक डेंगू के मच्छरों से बचने के लिए आप एंटीमोस्किटो क्रीम, स्प्रे, वेपराइजर, हर्बल ऑयल का उपयोग कर सकते हैं। रिपेलेंट लगाने से पहले बच्चों की त्वचा और एलर्जी का ध्यान रखना जरूरी है।
डेंगू फैलाने वाले मच्छर ज्यादातर दिन के समय काटते हैं। ऐसे में शरीर को ढककर रखना संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है। इसके लिए आप घर में रहते समय भी फुल स्लीव्स की टीशर्ट या नाइट सूट पहन सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यदि बच्चों को गर्मी अधिक लगती है तो ऐसे में उनको कॉटन के कपड़े पहनाएं। यह तरीका खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों और बाहर काम करने वालों के लिए उपयोगी माना जाता है।
एशियन जनरल ऑफ रिसर्च इन इनफेक्शियस डिजीज की स्टडी के अनुसार रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग मच्छरों से सुरक्षा प्रदान करने में मदद कर सकता है। रात को सोते समय बच्चों और बुजुर्गों के कमरे में मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सोते समय मच्छरों के संपर्क में आने की संभावना कम हो जाती है। साथ ही, डेंगू के संक्रमण का जोखिम भी कम होता है।