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चरणदास महंत या सिंहदेव के ''हाथ'' में हो कमान तो वापसी कर सकती है कांग्रेस

छत्तीसगढ़ Published by: paliwalwani Updated Fri, 27 Feb 2026 12:48 AM
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छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस भूपेश बघेल के कारण हारी

भूपेश बघेल के चेहरे पर खड़ी नहीं हो सकती पार्टी

आरोपों के घेरे में बघेल, विचार करे हाईकमान

विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन

छत्‍तीसगढ़. छत्‍तीसगढ़ में मिशन 2028 के लिए अभी लगभग तीन साल का समय है। किसी भी पार्टी को खड़ा होने में और अपना जनाधार वापस करने में इतना समय काफी होता है। छत्‍तीसगढ़ में यह स्थिति सटीक बैठ रही है। क्‍योंकि पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्‍व में आज छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस बुरे दौर से गुजर रही है। धीरे-धीरे कांग्रेस का जनाधार घटता जा रहा है।

कुशल नेतृत्‍व न होने से पार्टी बिखरने लगी है। लोगों के बीच भी पकड़ कमजोर हो गई है। भूपेश बघेल की दागदार छबि ने प्रदेश से कांग्रेस का बंटाधार कर दिया है। यहीं वह समय है जब प्रदेश में फिर से पार्टी को खड़ा किया जा सकता है। 2028 में अभी तीन साल का समय है। इन तीन साल में बेहतर और प्रभावी नेतृत्‍व कांग्रेस की वापसी करा सकता है। प्रदेश में डॉ. चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव जैसे अनुभवी और बेदाग छबि के नेता मौजूद हैं, जो अपने दमखम से पार्टी को जिंदा करने की काबिलियत रखते हैं।

महंत या सिंहदेव को मौका मिले तो स्थिति अलग होगी

डॉ. चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव- प्रदेश में दो ऐसे चेहरे हैं जो अपने दम पर कांग्रेस को जिंदा कर सकते हैं और सत्‍ता में वापसी करवा सकते हैं। यह छत्तीसगढ़ की राजनीति में अनुभवी और भरोसेमंद नाम हैं। यह दोनों सरल स्वभाव, स्पष्ट सोच और मजबूत संसदीय अनुभव के लिए जाने जाते हैं। सत्‍ता पक्ष और विपक्ष में रहकर इन्‍होंने हर भूमिका को गरिमा के साथ निभाया है। इनकी गिनती कांग्रेस पार्टी के अनुभवी और संतुलित नेतृत्व में होती है। सदन की मर्यादा, लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष निर्णयों के लिए उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त है। उनका पद और प्रतिष्ठा अनुभव, विश्वास और गरिमा का प्रतीक है। अब प्रदेश में महंत और सिंहदेव से बेहतर कोई विकल्प अब बचा नहीं है।

महंत के पास है व्‍यापक जनाधार

चरणदास महंत वे नेता हैं जिनके पास जनता का पर्याप्त जनाधार हैं। सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों को साथ लेकर चलने का माद्दा रखते हैं। इसका सबसे बड़ा परिणाम है कि सिंहदेव ने उप मुख्यमंत्री रहते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा किये जा रहे बघेल के विद्रोह को स्वतः आगे आकर संभाला और पार्टी की छवि को धूमिल होने से बचाया था। चरणदास महंत भी बेहद लोकप्रिय नेता हैं। यही कारण कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास अगर कोई लोकसभा सीट आई तो वह उनकी पत्नी ज्योत्सना महंत की सीट थी। क्योंकि इस सीट पर न सिर्फ ज्योत्सना ने बल्कि चरणदास महंत ने भी जमीनी स्तर पर लोगों से संपर्क साधा और जनाधार पाने में सफलता प्राप्त की।

अभी भी समय है संभलने का, नेतृत्‍व परिवर्तन पर विचार करे हाईकमान

हम सभी ने भूपेश बघेल के हिटलरशाही रवैये को बहुत करीब से देखा है। ऐसे में कोई भी कार्यकर्ता अब उनके नेतृत्व में कार्य करने को इच्छुक नहीं है। हर कार्यकर्ता और पार्टी नेता अपने-अपने स्तर से पार्टी आलाकमान तक बघेल के कारनामों का पुल्लिंदा पहुंचा चुके हैं। ऐसे में अब वह समय आ गया है जब पार्टी आलाकमान को बघेल पर कोई कड़ा एक्शन लेकर किसी जिम्मेदार व्यक्ति को छत्तीसगढ में पार्टी की कमान सौंपनी चाहिए। इससे पार्टी का कल, आज और कल में अवश्य सुधार आने की अपेक्षा है। क्योंकि अगर अब नहीं संभले तो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में दोबारा कभी नहीं संभल पाएगी। अभी भी समय है कि पार्टी हाईकमान नेतृत्‍व परिवर्तन पर विचार करे।                                                                                    

महंत जैसे अनुभवी नेताओं को मिली कमान तो छत्तीसगढ में वापस आ सकती है कांग्रेस

आज छतीसगढ़ कांग्रेस को अनुभवी और जनाधार वाले नेताओं की जरूरत है। चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव जैसे अनुभवी और कर्मठ नेता यदि आज भी प्रदेश की कमान संभालते हैं तो निश्चित रूप से प्रदेश में कांग्रेस वापसी कर सकती है। क्योंकि आज भी प्रदेश में कांग्रेस का जनाधार है। यदि इनको कमान सौंपी जाती है तो प्रदेश में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ शासन में आ सकती है। भूपेश बघेल ने जिस तरह से भ्रष्टाचार और अत्याचार किया हैं उसका ही परिणाम है कि वह सत्ता से बाहर हो गई। लेकिन कहते है कि समय के साथ सब कुछ बदल जाता है। पार्टी हाईकमान आज भी चाहे तो राज्य के नीति निर्धारक को बदलकर कांग्रेस को पुन: प्रदेश में काबिज कर सकते हैं।

2023 में कांग्रेस नहीं भूपेश बघेल हारे थे...!

हमने 2023 का आमचुनाव करीब से देखा। चुनाव भूपेश बघेल के चेहरे पर लडा़ गया था। लेकिन चुनाव के पहले ही बघेल की छबि एक भ्रष्‍टाचारी, अत्‍याचारी और कदाचारी बन चुकी थी। बघेल द्वारा बोये गये भ्रष्टाचार के बीज का परिणाम पार्टी को पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। आमजन के बीच यही संदेश गया कि‍ यदि दोबारा बघेल सत्‍ता में आते हैं तो निश्चित ही उनकी तानाशाही और हाबी हो जायेगी। इसीलिए लोगों ने उन्‍हें सत्‍ता से बाहर करने का निर्णय लिया। पार्टी हाईकमान अभी भी प्रदेश की कमान भ्रष्टाचारी और अनाचारी भूपेश बघेल को सौंप रखी है। बघेल ने मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान एक ऐसी चंडाल चौक़ड़ी का निर्माण किया था जिसने शासन की योजनाओं में घोटाले-भ्रष्टाचार करने का निर्णय लिया।

फिर मान‍हानि के केस में घिरे बघेल

  • असम के मुख्‍यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह, भूपेश बघेल और गौरव गोगोई के खिलाफ 500 करोड़ के हर्जाने के लिए मानहानि का केस किया है। उन्होंने कहा कि तीनों नेताओं ने मेरे खिलाफ झूठे, गलत इरादे वाले और बदनाम करने वाले आरोप लगाए हैं। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के परिवार ने पूरे राज्य में लगभग 12,000 बीघा ज़मीन हड़प ली है। इसके साथ ही भूपेश बघेल एक बार फिर कानूनी दांवपेंच में उलझ चुके हैं। बघेल की मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं दे रही हैं।

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