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'घूसखोर पंडत' पर क्यों हो रहा है विवाद? मनोज बाजपेयी की फिल्म को लेकर केस दर्ज

बॉलीवुड Published by: paliwalwani Updated Sat, 07 Feb 2026 01:02 AM
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लखनऊ.

मनोज बाजपेयी स्टारर नेटफ्लिक्स की अपकमिंग थ्रिलर 'घूसखोर पंडत' विवादों में घिर गई है. इस शो की घोषणा बुधवार को मुंबई में एक इवेंट में की गई और इसका टीज़र भी लॉन्च किया गया. फिल्म में मनोज बाजपेयी अजय दीक्षित नाम के एक भ्रष्ट और अनैतिक पुलिस ऑफिसर का किरदार निभा रहे हैं, जिसे पंडित के नाम से जाना जाता है.

इस फिल्म को रितेश शाह ने डायरेक्ट किया है और इसे शाह और नीरज पांडे ने मिलकर लिखा है. इसमें नुसरत भरूचा और साकिब सलीम भी अहम किरदारों में हैं. हालांकि ये फिल्म विवादों में फंस गई है और इस फिल्म की टीम के खिलाफ लखनऊ में एफआईआर भी दर्ज की गई है. चलिए यहां पूरा मामला जानते हैं.

घूसखोर पंडत के खिलाफ लखनऊ में मुक़दमा दर्ज

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में नेटफ्लिक्स फिल्म 'घूसखोर पंडित' के डायरेक्टर और टीम मेंबर्स के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म के कंटेंट से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और सामाजिक सद्भाव बिगड़ा है, जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने कार्रवाई की है.

अधिकारियों ने बताया कि फिल्म के कंटेंट को जनता के कुछ वर्गों ने आपत्तिजनक माना, जिससे अशांति या भावनाओं को ठेस पहुंचने की आशंका पैदा हुई. हज़रतगंज पुलिस के ख़ुद संज्ञान लेकर फ़िल्म के डायरेक्टर और उनकी टीम के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

घूसखोर पंडित को लेकर विवाद क्यों शुरू हुआ?

'नेक्स्ट ऑन नेटफ्लिक्स' इवेंट के दौरान 'घूसखोर पंडत' का टीजर रिलीज किए जाने के के तुरंत बाद ही ये विवादों में फंस गई. मुंबई के एक वकील, आशुतोष दुबे ने टाइटल पर आपत्ति जताते हुए नेटफ्लिक्स और फिल्म बनाने वालों को लीगल नोटिस भेजा. पंडत (पुजारी, धार्मिक विद्वान) शब्द का इस्तेमाल घूसखोर (उन लोगों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द जो रिश्वत लेते हैं) के साथ किया गया है. नोटिस में दावा किया गया है कि यह मेल अपमानजनक है और 'पंडित समुदाय' की गरिमा पर हमला है.

नोटिस में 'घूसखोर पंडत' टाइटल को तुरंत हटाने की मांग की गई है, इसे मानहानिकारक, असंवैधानिक और सामाजिक रूप से भड़काऊ बताया गया है. इसमें तर्क दिया गया है कि मेकर्स किसी समुदाय से जुड़ी पहचान वाले टाइटल के बजाय कोई न्यूट्रल या फिक्शनल टाइटल चुन सकते थे. इसमें आगे कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि व्यंग्य, फिक्शन या एंटरटेनमेंट की आड़ में किसी समुदाय को अपमानित या बदनाम किया जाए, खासकर जब होने वाले नुकसान का अंदाज़ा लगाया जा सके.”

घूसखोर पंडित का टीजर हटाने के आदेश

मनोज बायपेयी की आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडित' के ऊपर बढ़ते हुए विवाद को देखते हुए, केंद्र ने नेटफ्लिक्स को सभी जगह से फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट और टीजर को हटाने का आदेश दिया. जिसके बाद तत्कार प्रभाव से इसे हटा भी दिया गया है.

घूसखोर पंडत के फिल्म मेकर ने जारी किया बयान

विवाद के बीच, ‘घूसखोर पंडत’  के मेकर नीरज पांडे ने एक बयान जारी किया और फिल्म के पीछे अपना मकसद बताया. अपने बयान में नीरज पांडे ने लिखा, "हमारी फिल्म एक फिक्शनल कॉप ड्रामा है, और 'पंडत' शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक फिक्शनल कैरेक्टर के लिए बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है. 

  • कहानी एक व्यक्ति के कामों और फैसलों पर फोकस करती है और किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर कोई टिप्पणी नहीं करती या उसका प्रतिनिधित्व नहीं करती. एक फिल्म मेकर के तौर पर, मैं अपने काम को गहरी जिम्मेदारी के साथ करता हूं  ताकि ऐसी कहानियां बता सकूं जो सोच-समझकर और सम्मानजनक हों."
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