अजमेर.
अजमेर के पुष्कर मार्ग स्थित आदर्श विद्या निकेतन के प्रधानाचार्य भूपेंद्र उबाना ने लोगों से अपील की है कि जनगणना की जानकारी देते समय संस्कृत भाषा को भी लिखवाया जाए। उन्होंने बताया कि अब जब देश भर में जनगणना का काम शुरू हो गया है, तब सरकारी कार्मिक घर घर जाकर परिवार के बारे में जानकारी एकत्रित करेंगे।
उन्होंने बताया कि मातृ भाषा की जानकारी के साथ साथ यह भी पूछा जाएगा कि आप कौन कौन सी भाषाएं जानते हैं। उबाना ने कहा कि इस सवाल पर संस्कृत भाषा जानने का उल्लेख अवश्य करवाया जावे। उन्होंने बताया कि सनातन संस्कृति में विश्वास रखने वाले लोग पूजा अर्चना एवं अन्य सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में संस्कृत के मंत्रों का ही उच्चारण करते हैं।
इसलिए हर सनातनी संस्कृत भाषा से परिचित है। पिछले जनगणना में संस्कृत भाषा का उल्लेख नहीं किया गया, इसलिए जनगणना में संस्कृत भाषा के जानकारों की संख्या सीमित रही। उन्होंने बताया कि हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथ वेद-पुराण आदि सभी संस्कृत भाषा में है, यदि हमने जनगणना में संस्कृत भाषा का उल्लेख नहीं करवाया तो ऐसे ग्रंथों के प्रकाशन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि देव भाषा संस्कृत भारत की सबसे प्राचीन और सुंदर भाषा है। यह सभी भाषाओं की जननी है। इस भाषा को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि जनगणना में हमने जागरूकता नहीं दिखाई तो संस्कृत भाषा को विलुप्त घोषित कर दिया जाएगा। अन्य भाषाओं को विदेशों से वित्तीय सहायता मिलती है, जबकि संस्कृत भाषा के विकास और संरक्षण के लिए ऐसी कोई सहायता नहीं मिलती।
हमारी जागरूकता ही संस्कृत को जीवित रख सकती है। उन्होंने कहा कि पूजा अर्चना का अर्थ केवल डीजे बजाना नहीं होना चाहिए। जिस भाषा में हम रोजाना प्रार्थना और पूजा अर्चना करते हैं,उस भाषा को जीवित रखने की जिम्मेदारी भी हमारी है। संस्कृत भाषा का संरक्षण सिर्फ सरकार के भरोसो नहीं हो सकता है, इसके लिए हर सनातनी को जागरूक होने की जरूरत है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षण संस्थाओं में संस्कृत भाषा भी सिखवाए। भारत की सनातन संस्कृति में संस्कृत का विशेष है। जनगणना और संस्कृत भाषा के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9511594284 पर भूपेंद्र उबाना से ली जा सकती है।
S.P.MITTAL BLOGGER