असली साब तो ऊपरे बैठों : राजेन्द्र सनाढ्य राजन

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किनी साब केई दा तो, 

काया वंडी अंटाई जा, 

हात मीना रो पेट वे जूँ, 

वो फूल न कूपों वैई जा। 

किनी साब नी केवां तो, 

वो घणो नाराज वैई जा, 

अर अमरिया बळद जूँ 

ऊपरे केरावां लागी जा। 

नराई दूध ऊँ मुंडों धोवें,

म्हाणें ई कोई साब केई जा, 

कोई अणी में सफळ वे, 

कोई मचक-मचक करता रैईजा। 

कोई थोथा साब वण न 

अठै घूमता ई रैई जा, 

हर कोई मजाका वणावें, 

मुकरी वण न रैई जा। 

कोई साब नी है,अर विने,

मुंडा ऊँ साब केवां ई जा, 

कंडी तो मन मा लाडू फूटे, 

कोई बिचारों हरमाई जा। 

कोई बिचारा हुदा वे 

 काम करता रैई जा, 

कोई साब के,भली नी के, 

तोई वणा रो नाम वैई जा। 

साब केवाऊँ,नी केवावां ऊँ, 

राजन क ई ठंडाई पड़ी जा, 

असली साब तो ऊपरे बैठों,

वो कदी नाराज नी वैई जा। 

वो कदी नाराज नी वैई जा।। 

राजेन्द्र नाढ्य राजन

वाइस प्रिंसिपल राउमावि. नमाना

नि-कोठारिया, जि-राजसमंद, राजस्थान

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