काया वंडी अंटाई जा,
हात मीना रो पेट वे जूँ,
वो फूल न कूपों वैई जा।
वो घणो नाराज वैई जा,
अर अमरिया बळद जूँ
ऊपरे केरावां लागी जा।
म्हाणें ई कोई साब केई जा,
कोई अणी में सफळ वे,
कोई मचक-मचक करता रैईजा।
अठै घूमता ई रैई जा,
हर कोई मजाका वणावें,
मुकरी वण न रैई जा।
मुंडा ऊँ साब केवां ई जा,
कंडी तो मन मा लाडू फूटे,
कोई बिचारों हरमाई जा।
काम करता रैई जा,
कोई साब के,भली नी के,
साब केवाऊँ,नी केवावां ऊँ,
राजन क ई ठंडाई पड़ी जा,
असली साब तो ऊपरे बैठों,
वो कदी नाराज नी वैई जा।
वो कदी नाराज नी वैई जा।।
वाइस प्रिंसिपल राउमावि. नमाना
नि-कोठारिया, जि-राजसमंद, राजस्थान