MISSION 2023 : MP में आदिवासी वोटर लुभाने में जुटीं BJP-कांग्रेस
मध्यप्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव में लंबा समय बाकी हो, लेकिन BJP और कांग्रेस ने मिशन 2023 के लिए मैदानी तैयारियां शुरू कर दी हैं। यही वजह है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाने के मामले में श्रेय लेने के लिए दोनों दल एक-दूसरे पर हमलावर रहे। अब दोनों दलों का फोकस एक बार फिर आदिवासी वोट बैंक साधने पर है।
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ आज बड़वानी में आदिवासी अधिकार यात्रा का आगाज करेंगे, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गोंड राजाओं की राजधानी रहे जबलपुर में 18 सितंबर को अभियान की शुरुआत करेंगे। BJP ने अमित शाह के कार्यक्रम के लिए 18 सितंबर का दिन इसलिए चुना है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1858 को अंग्रेजों ने गोंड राजा रघुनाथ शाह और शंकर शाह को तोप के मुंह से बांधकर उड़ा दिया था।
अमित शाह इसी दौरान आजादी-75 और आधुनिक भारत कार्यक्रमों का शुभारंभ करेंगे। इस कार्यक्रम के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। दोनों बलिदानियों का आदिवासी समुदाय में काफी प्रभाव है। इनके सम्मान से आदिवासियों के बीच भाजपा की पैठ बढ़ाने की रणनीति भी इसे माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। सामान्य वर्ग की 31 सीटों पर भी आदिवासी समुदाय निर्णायक भूमिका में हैं। 2003 के पहले आदिवासी वोट बैंक परंपरागत रूप से कांग्रेस का माना जाता था। BJP ने इसमें सेंध लगा दी। आदिवासी कांग्रेस से छिटक गए। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 47 आदिवासी सीटों में से 30 सीटें मिली थीं, BJP को 16 सीटों से संतोष करना पड़ा।
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जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस) का मालवांचल में प्रभाव बढ़ रहा है। यह प्रभाव महाकौशल-विंध्य क्षेत्र तक न पहुंचे, इसलिए BJP इन क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय को अपने पक्ष में करने के लिए आयोजन कर रही है। यह क्षेत्र विधानसभा और लोकसभा सीटों के लिए आदिवासी बहुल वाला है।
मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया आदि जिलों में आदिवासी जनसंख्या अधिक है। मंडला और शहडोल लोकसभा की सीट आदिवासी हैं, तो 15 से अधिक विधानसभा सीटों पर यह वर्ग निर्णायक वोटर है। जयस अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने के लिए महाकौशल-विंध्य की ओर बढ़ रहा है। चुनाव के समय यह वर्ग जयस के पक्ष में जाए, इसे लेकर भाजपा अभी से जुट गई है।
जयस आदिवासियों के प्रमुख संगठन के रूप में उभरा है। कांग्रेस भी जयस को समर्थन दे रही है। 2018 चुनाव में जयस नेता डॉ. हीरालाल अलावा को कांग्रेस ने टिकट दी और वे जीते। अब हालात बदलते दिख रहे हैं। वजह है कि कांग्रेस की 15 महीने की सरकार में जयस का कांग्रेस पर से भरोसा खत्म होता दिखा। अब जयस के निशाने पर कांग्रेस-बीजेपी दोनों हैं।
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