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मध्य प्रदेश

मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ के कथित गबन का मामला : रसीद में पूरी रकम, बैंक में जमा होती थी कम, तीन गिरफ्तार

📅 23 August 2026, 11:25 PM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 6 मिनट में पढ़ें
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मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ के कथित गबन का मामला : रसीद में पूरी रकम, बैंक में जमा होती थी कम, तीन गिरफ्तार
मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ के कथित गबन का मामला : रसीद में पूरी रकम, बैंक में जमा होती थी कम, तीन गिरफ्तार

जबलपुर. नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कैश अनुभाग में करीब 1 करोड़ 63 लाख 76 हजार 465 रुपए के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि अप्रैल 2020 से नवंबर 2025 के बीच अस्पताल में प्राप्त होने वाली राशि की मनी रसीद बुक में पूरी रकम दर्ज की जाती रही, लेकिन  बैंक खाते में उससे कम राशि जमा की गई।

करीब छह वर्षों के दौरान रसीदों और बैंक में जमा रकम के बीच लगातार अंतर होने का मामला कॉलेज स्तर पर हुई जांच में सामने आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने दस्तावेजों की जांच और रसीद बुक का बैंक रिकॉर्ड से मिलान कराया। इस दौरान कुल 1,63,76,465 रुपए का अंतर सामने आया। जांच के आधार पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर गढ़ा थाना पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।

पुलिस ने मामले में रिटायर्ड कैशियर मनोहर केवट, कैशियर साधना चन्द्रोल, सहायक ग्रेड-3 भानू सिंह शाक्यवार, कैशियर सह प्रभारी अरविंद धुर्वे और सहायक ग्रेड-3 विशाल सराठे को आरोपी बनाया है। पुलिस के अनुसार मामले में सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि कैश अनुभाग में राशि प्राप्त होने से लेकर बैंक में जमा किए जाने तक की प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई। मामले में पुलिस ने भानू सिंह शाक्यवार, अरविंद धुर्वे और विशाल सराठे को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों को न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद पुलिस ने तीन दिन की रिमांड पर लिया है।

रिमांड के दौरान पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और कैश अनुभाग से संबंधित रिकॉर्ड, मनी रसीद बुक, बैंक जमा पर्चियां तथा अन्य दस्तावेजों की जानकारी जुटाई जा रही है। वित्त जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि रसीद बुक में जमा होने वाली राशि का पूरा विवरण दर्ज था, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में उसी अवधि में कम रकम जमा होने का उल्लेख मिला।

कॉलेज स्तर पर जब दोनों रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो रकम में बड़ा अंतर सामने आया। जांच एजेंसियों के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि यह अंतर किसी एक समय की गड़बड़ी का परिणाम था या लंबे समय तक सुनियोजित तरीके से राशि कम जमा की जाती रही। करीब छह साल की अवधि में इतनी बड़ी राशि का अंतर सामने आने से कैश अनुभाग की आंतरिक निगरानी और लेखा प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामले की जांच का प्रमुख बिंदु यही है कि अप्रैल 2020 से नवंबर 2025 तक रसीद बुक और बैंक में जमा राशि के बीच अंतर होने के बावजूद यह गड़बड़ी समय रहते पकड़ में क्यों नहीं आई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कैश कलेक्शन, रसीद जारी करने, दैनिक हिसाब-किताब तैयार करने और बैंक में राशि जमा करने की जिम्मेदारी किन-किन कर्मचारियों के पास थी।

इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित अवधि में कैश बुक, बैंक बुक, रसीद बुक और अन्य लेखा दस्तावेजों का नियमित मिलान किया गया था या नहीं। यदि मिलान किया गया था तो अंतर सामने आने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसकी भी पड़ताल की जा सकती है।

दस्तावेजों और लेन-देन की होगी गहन जांच

पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच कर रही है। रसीद बुक में दर्ज रकम, बैंक में जमा रकम, जमा पर्चियों और कैश रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर कम जमा की गई राशि कहां गई और इसमें कौन-कौन लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे।

मामले की जांच आगे बढऩे के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 1.63 करोड़ रुपए के अंतर की पूरी तस्वीर क्या है, कितनी राशि वास्तव में गबन हुई और प्रत्येक आरोपी की भूमिका क्या रही। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और गिरफ्तार तीन आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले में आगे और तथ्य सामने आने की संभावना है।

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