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कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 में समयबद्ध डेटा प्रोटेक्शन शामिल किया जाना चाहिए : क्रॉपलाइफ इंडिया

📅 19 August 2026, 11:13 PM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 10 मिनट में पढ़ें
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कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 में समयबद्ध डेटा प्रोटेक्शन शामिल किया जाना चाहिए : क्रॉपलाइफ इंडिया
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 में समयबद्ध डेटा प्रोटेक्शन शामिल किया जाना चाहिए : क्रॉपलाइफ इंडिया

नयी दिल्ली. 19 अगस्त (भाषा) भारत की पांच सबसे बड़ी कृषि-रसायन बनाने वाली कंपनियों ने संयुक्त रूप से सरकार से ‘कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025’ के मसौदे में नियामकीय आंकड़ों की सुरक्षा का प्रावधान शामिल करने को कहा है। उनका तर्क है कि ऐसे ढांचे की कमी के कारण देश में नए और सुरक्षित कीटनाशक ‘मॉलिक्यूल’ के आने में देरी हो रही है।

एक संयुक्त बयान में, क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, रैलिस इंडिया, धनुका एग्रीटेक, पीआई इंडस्ट्रीज और गोदरेज एग्रोवेट–जो सभी उद्योग निकाय ‘क्रॉपलाइफ इंडिया’ के सदस्य हैं – ने एक नए मॉलिक्यूल या नए इस्तेमाल के पहले पंजीकरण से शुरू होने वाली पांच साल की, समय-सीमा वाली डेटा सुरक्षा अवधि की मांग की।

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 में समयबद्ध डेटा प्रोटेक्शन शामिल किया जाना चाहिए : क्रॉपलाइफ इंडिया – भारत की पांच प्रमुख कीटनाशक कंपनियों, क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, रैलिस इंडिया, धनुका एग्रीटेक, पीआई इंडस्ट्रीज और गोदरेज एग्रोवेट, ने क्रॉपलाइफ इंडिया के माध्यम से भारत सरकार से कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 में सीमित और समयबद्ध रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन (पीआरडी) व्यवस्था शामिल करने का आग्रह किया है। कंपनियों का कहना है कि इससे भारत में नए, अधिक सुरक्षित और कम मात्रा में प्रभावी कीटनाशक अणुओं को लाने के लिए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। डेटा प्रोटेक्शन की अवधि समाप्त होने के बाद ये अणु जेनेरिक निर्माताओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित पूरे घरेलू उद्योग के लिए उपलब्ध हो सकेंगे।

क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के कार्यकारी चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने कहा, “बदलते कीट दबाव के कारण आधुनिक कीटनाशक समाधानों की आवश्यकता बढ़ रही है, लेकिन किसानों की नवीनतम तकनीकों तक पहुंच अभी भी सीमित है। समयबद्ध डेटा प्रोटेक्शन की व्यवस्था किसानों तक नए और अधिक सुरक्षित समाधान जल्दी पहुंचाने में मदद करेगी। साथ ही, इस अवधि के बाद प्रत्येक नया अणु पूरे उद्योग के लिए उपलब्ध होगा।”

बदलते कीट, खरपतवार और रोगों का दबाव नए कीटनाशक समाधानों की आवश्यकता बढ़ा रहा है। नए अणु अधिक लक्षित हो सकते हैं, कम मात्रा में प्रभावी हो सकते हैं और बेहतर सुरक्षा प्रोफाइल के साथ अधिक भरोसेमंद कीट नियंत्रण उपलब्ध करा सकते हैं। भारत में कीट, खरपतवार और रोगों के कारण हर वर्ष कृषि उत्पादन का अनुमानित 10 से 35 प्रतिशत प्रभावित होता है, जिससे करीब 2 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण यह दबाव और बढ़ सकता है।

नए और आधुनिक कीटनाशक अणुओं का व्यापक पोर्टफोलियो भारतीय कीटनाशक उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और कृषि निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत में वर्तमान में करीब 380 कीटनाशक अणु पंजीकृत हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर लगभग 1,200 अणुओं का उपयोग किया जाता है। इस पोर्टफोलियो के विस्तार से भारतीय निर्माताओं को अधिक तकनीकों तक पहुंच मिल सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती अवशेष सीमा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में कृषि निर्यात को मदद मिल सकती है।

किसी नए कीटनाशक अणु को भारत में पंजीकृत कराने के लिए सुरक्षा, प्रभावकारिता और अवशेष संबंधी विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता होती है। इसमें करीब 40 से 50 करोड़ रुपये का निवेश और छह से आठ वर्ष तक का समय लग सकता है। वर्तमान व्यवस्था में बाद के आवेदक काफी कम लागत पर उसी नियामकीय डेटा का उपयोग कर सकते हैं। यह लागत करीब 75 लाख रुपये आंकी गई है। इससे कंपनियों के लिए नए अणुओं को भारत में पेश करने का व्यावसायिक प्रोत्साहन कम हो जाता है।

समयबद्ध डेटा प्रोटेक्शन इस अंतर को दूर कर सकता है, जबकि दीर्घकाल में प्रतिस्पर्धा को बनाए रखा जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत डेटा प्रोटेक्शन की अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित अणु जेनेरिक निर्माताओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित पूरे उद्योग के लिए उपलब्ध हो जाएगा। यह व्यवस्था केवल नए अणुओं और नए उपयोगों पर लागू होगी और भारतीय बाजार में पहले से उपलब्ध उत्पादों को प्रभावित नहीं करेगी।

डेटा प्रोटेक्शन की अवधि पूरी होने के बाद भारतीय निर्माता, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यम, आधुनिक कीटनाशक अणुओं के बड़े समूह तक पहुंच बना सकेंगे। इससे इन उत्पादों के घरेलू विनिर्माण और निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था मौजूदा उद्योग को सीमित करने के बजाय नए उत्पादों और तकनीकों के लिए उद्योग के आधार का विस्तार कर सकती है।

भारत में रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन की व्यवस्था शुरू होने से देश का नियामकीय ढांचा उन प्रमुख कृषि बाजारों के अनुरूप हो सकता है, जहां नए कीटनाशकों के लिए डेटा प्रोटेक्शन पहले से उपलब्ध है। चीन में छह वर्ष का डेटा प्रोटेक्शन है, जबकि थाईलैंड, ब्राजील और अमेरिका में यह अवधि दस वर्ष तक है। यूरोपीय संघ में यह अवधि दस वर्ष है और कुछ कम जोखिम वाले तथा जैविक उत्पादों के लिए इसे बढ़ाकर 13 वर्ष तक किया जा सकता है। भारत में फिलहाल ऐसी समान व्यवस्था नहीं है।

रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन का मुद्दा केवल नए कीटनाशकों को बाजार में लाने तक सीमित नहीं है। नए अणुओं के पंजीकरण के लिए कंपनियों को सुरक्षा, प्रभावकारिता और अवशेष संबंधी विस्तृत वैज्ञानिक डेटा तैयार करना पड़ता है। इससे भारतीय प्रयोगशालाओं और फील्ड स्टेशनों में अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। डेटा प्रोटेक्शन अवधि के दौरान पहला पंजीकरण कराने वाली कंपनी उत्पाद प्रबंधन और प्रतिरोध प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभाती है।

जब किसी एक अणु के लिए बड़ी संख्या में पंजीकरण हो जाते हैं, तो अत्यधिक मूल्य प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ सकता है। इससे अति-उपयोग, गलत उपयोग और नकली या घटिया उत्पादों के प्रसार का जोखिम भी बढ़ सकता है। समयबद्ध डेटा प्रोटेक्शन से गुणवत्ता, अनुसंधान, उत्पाद प्रबंधन और जिम्मेदार उपयोग में निवेश के लिए बेहतर प्रोत्साहन मिल सकता है।नए अणुओं के पंजीकरण के लिए स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए डेटा की आवश्यकता होती है। डेटा प्रोटेक्शन अवधि के दौरान पहला पंजीकरण कराने वाली कंपनी उत्पाद प्रबंधन और प्रतिरोध प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाती है। इससे भारतीय प्रयोगशालाओं और फील्ड स्टेशनों में अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ कीटनाशकों के जिम्मेदार उपयोग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार से कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 के माध्यम से सीमित और समयबद्ध डेटा प्रोटेक्शन व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया है। संगठन ने नए अणुओं और नए उपयोगों के पहले पंजीकरण से पांच वर्ष की डेटा प्रोटेक्शन अवधि का प्रस्ताव रखा है। संगठन के अनुसार, यह अवधि नए अणुओं को भारत में लाने के लिए आवश्यक निवेश को प्रोत्साहन देगी, जबकि डेटा प्रोटेक्शन अवधि समाप्त होने के बाद जेनेरिक उद्योग और एसएमई के लिए बाजार में प्रवेश का रास्ता खुला रहेगा।

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