लीना चंद्रावरकर हिंदी सिनेमा की एक मशहूर और लोकप्रिय अभिनेत्री
लीना चंद्रावरकर हिंदी सिनेमा की एक मशहूर और लोकप्रिय अभिनेत्री रही हैं, जिन्होंने 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया.
अपनी खूबसूरत मुस्कान और बेहतरीन अभिनय से लाखों दिलों पर राज करने वाली लीना चंद्रावरकर की जिंदगी पर्दे पर जितनी हसीन दिखती थी, असल जिंदगी उतनी ही दुखों से भरी रही।
उनके बारे में अक्सर कई गलत बातें की जाती हैं.. लेकिन एक बार फिल्मफेयर को दिए अपने एक इंटरव्यू में लीना ने अपनी जिंदगी के उन पन्नों को खोला, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। लीना बचपन से ही अभिनेत्री मीना कुमारी की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं, और उन्ही की तरह एक्ट्रेस बनना चाहती थीं।
साल 1965 में फ़िल्मफ़ेयर द्वारा आयोजित ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने की इच्छा जब उन्होंने अपने पिता से जताई तो उनके पिता , स्वर्गीय श्रीनाथ चंदावरकर ने इसे ठुकरा दिया था।लेकिन लीना जिद पर अड़ गई, उन्होंने अपनी किताबें गैरेज में फेंक दीं और कहा कि वो एसएससी की परीक्षा नहीं देंगी, तब उनके पिताजी ने उनकी बात मान ली थी.. हालांकि इस प्रतियोगिता में 15 वर्षीय लीना चंद्रावरकर रनर-अप रही थीं, और इस प्रतियोगिता के विजेता राजेश खन्ना और फरीदा जलाल थे..
उनकी सास जब भी उम्मीद से होती थीं, तो उन्हें सपने में कोबरा दिखाई देता था। लेकिन जब सिद्धार्थ का जन्म होने वाला था, तब उन्हें नाग नहीं दिखा। मगर उनकी शादी से छह महीने पहले, उनकी सास फिर से सपने में एक कोबरा देखा। वो बहुत डर गईं और उन्हें लगा कि शादी से उसका भाग्य बदल जाएगा। इसलिए उन्होंने जल्दी में 8 दिसंबर 1975 को उनकी शादी करा दी।
लेकिन 11 दिनों के भीतर ही त्रासदी हो गई। लीना जी और उनके पति अपने हनीमून के लिए निकलने ही वाले थे कि 18 दिसंबर को सिद्धार्थ को अपनी ही रिवॉल्वर साफ करते समय दुर्घटनावश गोली लग गई..
सात बेटों को खो चुकी हूँ तो क्या मुझे उन सात बेटों के लिए भी तुम्हें जिम्मेदार ठहराना चाहिए..?
इस हादसे के बाद लोग उन्हें मांगलिक कहते थे… तब उन्होंने एक दिन अपने पति सिद्धार्थ की माँ से कहा कि जब वो ठीक हो जाएंगे तो हम उनकी दोबारा शादी करा देंगे क्योंकि मैं उनके लिए अशुभ रही हूँ… इस पर उनकी सास ने उन्हें जवाब दिया कि मैं तो पहले भी अपने सात बेटों को खो चुकी हूँ तो क्या मुझे उन सात बेटों के लिए भी तुम्हें जिम्मेदार ठहराना चाहिए..?
उन्होंने अपने पति की इतनी सेवा की कि डॉक्टर उन्हें सावित्री कहने लगे थे.. और ये उनकी सेवा का ही नतीजा था कि सिद्धार्थ ठीक होकर घर आ गए.. लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से उनकी तबीयत खराब हुई और उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, लेकिन डॉक्टर की तमाम कोशिशों के बावजूद वो बच नहीं पाए और उनका निधन हो गया… मात्र 25 साल की उम्र में लीना विधवा हो चुकी थीं..
सिद्धार्थ के जाने के बाद लीना जी बहुत डिप्रेशन में चली गई, उन्हें लगने लगा था कि उनकी वजह से ही सिद्धार्थ की जान गई। उस दौरान उनके माता-पिता अपने साथ धारवाड़ ले आए.. जब लीना अपने दुखों से उबरने की कोशिश कर रही थीं, तब उनकी जिंदगी में महान गायक किशोर कुमार की एंट्री हुई। किशोर कुमार खुद अपनी जिंदगी में अकेलेपन से जूझ रहे थे।
एक दिन किशोर दा ने लीना के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। जिसे सुनकर वो हैरान थी। उन्होंने उनसे कहा कि आपके लिए शादी एक आम बात हो सकती है क्योंकि किशोर दा की पहले तीन शादियां हो चुकी थीं, लेकिन मैं अभी तक अपने पहले पति के गम से बाहर नहीं आई हूँ।"
इस पर किशोर दा ने बड़े ही मजाकिया अंदाज में कहा था, "अच्छा बाबा, सीरियस मत हो, प्रपोजल कैंसिल! लीना जी ने आगे कहा था कि किशोर कुमार से उन्हें कभी पहली नज़र में प्यार नहीं हुआ था, लेकिन उनके साथ रहकर वो सुरक्षित महसूस करती थी, आख़िरकार धीरे-धीरे लीना को किशोर कुमार में एक सच्चा दोस्त नजर आने लगा और उन्हें किशोर कुमार से प्यार हो गया..
जब उन्होंने शादी का फैसला किया तो उनके पिता इस शादी के ख़िलाफ़ हो गए, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी एक ऐसे इंसान से शादी करे जो पहले से तीन शादियां कर चुका हो और उम्र में भी काफी बड़ा हो।
उनके पिता ने तो यहाँ तक कह दिया था कि अगर तुम्हें उसी घर में शादी करनी है तो किशोर के बेटे अमित कुमार से कर लो, लेकिन किशोर कुमार से हरगिज़ नहीं…
लीना के माता-पिता नाराज़ होकर अपने घर चले गए.. इसके बाद किशोर कुमार ने लीना के पिता को मनाने के लिए लीना के घर धारवाड़ पहुंचे और उनके पिता के सामने बैठकर तब तक गाने गाते रहे जब तक कि वे मान नहीं गए। तब उन्होंने रूप अपनी ही फिल्म का गाना नफरत करने वालों के सीने में प्यार भर दो गाकर उनके पिता का दिल जीत लिया।
पिता के मान जाने के बाद दोनों ने साल 1980 में पूरे रीति-रिवाज और पारिवारिक सहमति के साथ शादी की। लेकिन नियति का क्रूर मजाक देखिए.. खुशियां अभी लीना की जिंदगी में पूरी तरह लौटी भी नहीं थीं कि किस्मत ने फिर करवट बदली। शादी के महज 7 साल बाद, 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया।
उस वक्त उनका बेटा सुमीत सिर्फ 5 साल का था। और वो 36 साल की उम्र में दोबारा विधवा हो गई। अपने इस दुख के अलावा, उन्हें अपने सौतेले बेटे अमित कुमार से नज़दीकी को लेकर फैली तमाम अफवाहों का भी सामना करना पड़ा। दरअसल उन दिनों सुमीत की स्कूल टीचर उसे ट्यूशन देने घर आती थीं। वो किशोर कुमार की मौत के बारे में मनगढ़ंत बनाकर स्कूल में सुनाती थीं,
उसने स्कूल स्टाफ से कहा कि किशोर कुमार ने घर आकर अपनी पत्नी को अपने बेटे अमित के साथ देखा और कालीन पर गिर पड़े.. जबकि सच तो ये था कि किशोर कुमार की मृत्यु के समय अमित घर पर थे ही नहीं। किशोर कुमार की मृत्यु के महीनों बाद, वो टीचर लीना जी के घर आईं और माफी मांगते हुए बोलीं, मेरे बेटे ने आत्महत्या कर ली है। मुझे कबूल करना होगा, मैंने आपके बारे में झूठी कहानियां फैलाईं। कृपया मुझे माफ कर दीजिए।
एक कप चाय पीकर दोबारा मुस्कुरा देती हूँ...
आज लीना चंद्रावरकर मुंबई के उसी बंगले में किशोर कुमार की पहली पत्नी के बेटे अमित कुमार, बहू और अपने बेटे सुमीत के साथ एक ही छत के नीचे बेहद प्यार से रहती हैं। लीना कहती हैं, मेरी जिंदगी किसी फिल्म जैसी रही है। अब जब भी मुझे दुख होता है, मैं कमरे का दरवाजा बंद करती हूँ, टीवी की आवाज तेज करती हूँ और जी भरकर रो लेती हूँ... फिर एक कप चाय पीकर दोबारा मुस्कुरा देती हूँ।
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