उदयपुर.
'डॉ रामप्रसाद दाधीच साहित्य सम्मान 2025 ' उदयपुर की युवा कवयित्री, कहानीकार डॉ.ममता पानेरी W/O डॉ सुरेन्द्र पालीवाल को उनके कहानी संग्रह 'वास्तव' पर अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद के तत्वावधान में भव्य समारोह में प्रदान किया गया। आपको सम्मान राशि 11000 रुपए, प्रशस्ति पत्र, शॉल और श्रीफल प्रदान किया गया।
परिषद की अध्यक्ष सुश्री गीता भट्टाचार्य तथा महामंत्री डॉ.पद्मजा शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के अध्यक्ष कथाकार हबीब कैफ़ी ने डॉ रामप्रसाद दाधीच को याद करते हुए कहा कि हमारे बीच उम्र का बहुत फासला था फिर भी डॉ.दाधीच मुझे अपना समझते थे। उन्होंने राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृति पर भी अनेक निबंध लिखे।
कैफ़ी ने डॉ. ममता पानेरी की कहानियों पर बात करते हुए कहा कि यह रचनाकार के लिए बड़ी खुशी की बात होती है कि उसकी पहली ही रचना पर वह सम्मानित हो और उसकी किताब पर चर्चा हो। इससे लेखक को मान्यता मिलती है, उसे प्रोत्साहन मिलता है। कहानी वही जिसमें जिंदगी की धड़कनें रहें, जो हमें याद रह जाए। जिंदगी सृजन का नाम है और हमें सृजन करते रहना चाहिए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार सुषमा चौहान ने इस अवसर पर कहा कि मेरा अपना अनुभव कहता है कि कोई घटना जब रचनाकार की पैनी नज़र में समाती है तो वह उसका सुख चैन छीन लेती है। उसका मन अशांत रहता है।घटना एक ही होती है, पर उसे देखने का नज़रिया सबका अलग-अलग होता है।सबका शब्द संयोजन, वाक्य निर्माण, भाषा, सभी कुछ अलग होता है। आज की सम्मानित कृति में कुल दस कहानियाँ हैं जिनमें से नौ कहानियाँ समाज की विद्रूपताऐं दिखाती हैं और महसूस कराती हैं कि परिवार में संवादहीनता का कितना दुष्प्रभाव होता है ।
डॉ. ममता पानेरी ने कहानियों की रचना प्रक्रिया पर बात की तथा कहानी ‘नवधा’ का वाचन किया ।उन्होंने कहा कि कहानियों के कथानक हमारे इर्द-गिर्द से ही लिए गए हैं कोई आभासी चकाचौंध यहां नहीं है जो कुछ है सीधा व सरल है। इन कहानियों में आपको यथार्थ और आदर्श का मिला-जुला रूप दिखाई देगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि इन कहानियों की रचना के पीछे की कहानियां कुछ अलग हैं जिन्होंने मुझे इनकी रचना के लिए प्रेरित किया। 'वास्तव' कहानी-संग्रह में दस कहानियां हैं जो विभिन्न विषय,प्रसंग व घटनाएं लिए हुए है और जो समय समाज को एक सूत्र में बांधने का प्रयास करती हैं।
डॉ.रेणुका श्रीवास्तव ने ममता पानेरी के कथा संग्रह ‘वास्तव’ पर पत्र वाचन करते हुए कहा कि संग्रह में ममता जी अपने आसपास के परिवेश से जुड़ी घटनाओं पर कलम चलाती हैं, जिन्हें हम सब रोजमर्रा की जिंदगी में देखते हैं। कहानी संग्रह विभिन्न कथानक लिए संवेदनशील अभिव्यक्ति लिए हुए है।
लेखक का संवेदनशील होना रचना को प्रभावशाली बनाता है। संग्रह की कहानियाँ सहज और सरल होने के कारण संप्रेषणीय हैं। वे पाठक के साथ आसानी से रिश्ता बना लेती हैं। मैं उम्मीद करती हूँ ममता जी की कहानियाँ हवा में गुम न होकर शताब्दियों तक अपनी यात्रा तय करें।
डॉ.पद्मजा शर्मा ने डॉ.रामप्रसाद दाधीच के व्यक्तित्व-कृतित्व एवं दाधीच साहित्य सम्मान की यात्रा के बारे में कहा कि यह सम्मान 2017 से निरंतर राजस्थान के युवा साहित्यकारों को दिया जा रहा है जिसे परिषद के साथ मिलकर डॉ. रामप्रसाद दाधीच ने अपने जीवन काल में ही प्रारंभ कर दिया था। डॉ. रामप्रसाद दाधीच की 80 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी थी –कविता, नाटक, काव्यान्तर,शोध ग्रंथ ,राजस्थानी एवं लोक साहित्य, बाल साहित्य, पुस्तक सम्पादन, पत्रिकाओं का सम्पादन, नाटक, अनुवाद में बहुत काम किया आपने।
युवा कवि कल्याण विश्नोई ने समस्त अतिथियों,सुधि श्रोताओं का शब्दों पुष्पों से स्वागत करते हुए कहा कि आप सब समय निकालकर पधारे हैं, यह इस तरफ संकेत करता है कि साहित्य व सृजन के एजओट आप में जागृत है। आगे आपने कहा अ-डॉ ममता पानेरी को उनके प्रथम कहानी संग्रह ‘वास्तव’ पर सम्मानित किया जा रहा है, में दस कहानियाँ हैं जो विविध विषयों, प्रसंगों ,परिस्थितियों व घटनाओं का सुंदर चित्रण करते हुए समाज को एकता के सूत्र में बांधती हैं।
दाधीच साहित्य सम्मान के निर्णायक मंडल में डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय, डॉ मंजु चतुर्वेदी एवं हरिप्रकाश राठी थे। सम्मानित अतिथियों को गांधी डायरी एवं पेन भेंट किए गए। इससे पूर्व माँ सरस्वती का माल्यार्पण किया गया। मधुर परिहार ने कार्यक्रम का सुंदर संचालन किया।