आईपीओ बाजार में इन दिनों निवेशकों का उत्साह चरम पर है, जहां कई कंपनियों के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) ने शानदार प्रदर्शन किया है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में रिकॉर्ड उछाल और जबरदस्त सब्सक्रिप्शन ने बाजार में हलचल मचा दी है। हालांकि, इस उत्साह के बीच कुछ ऐसे इश्यू भी हैं, जिन्हें निवेशकों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया है, जिससे यह साफ होता है कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती। बाजार में एक ओर जहां कुछ आईपीओ खुलने से पहले ही निवेशकों की पहली पसंद बन गए हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ कंपनियों को अपने इश्यू बंद होने तक भी पूरा सब्सक्रिप्शन जुटाने में मशक्कत करनी पड़ रही है।
हाल ही में, स्टील पाइप और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोडक्ट्स बनाने वाली एक कंपनी के आईपीओ ने निवेशकों का ध्यान खींचा है, जिसका जीएमपी मात्र तीन दिनों में दोगुना हो गया। इसी तरह, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की मल्टी-ब्रांड रिटेल चेन के एक और इश्यू का जीएमपी भी तीन दिनों में 30 रुपये से बढ़कर 80 रुपये तक पहुंच गया, जबकि इसके खुलने में अभी चार दिन शेष थे। इन आंकड़ों ने बाजार विश्लेषकों को भी चौंका दिया है और निवेशकों के बीच इन कंपनियों के शेयरों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। वहीं, 1255 करोड़ रुपये के एक बड़े आईपीओ ने तो सब्सक्रिप्शन विंडो पर धूम ही मचा दी, जिसे 36जीएमपी के साथ 72 गुना से भी अधिक सब्सक्राइब किया गया, जो निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है।
इस मिश्रित रुझान से यह स्पष्ट होता है कि निवेशक अब कंपनियों के मूलभूत सिद्धांतों और भविष्य की संभावनाओं का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं। जहां मजबूत वित्तीय स्थिति और आकर्षक मूल्यांकन वाले आईपीओ को हाथों-हाथ लिया जा रहा है, वहीं कमजोर फंडामेंटल या अधिक मूल्यांकन वाले इश्यू को नजरअंदाज किया जा रहा है। 80 करोड़ रुपये के एक आईपीओ का उदाहरण सामने है, जिसे 16जीएमपी होने के बावजूद दो दिनों में केवल 48 प्रतिशत ही सब्सक्रिप्शन मिल पाया और यह 15 सितंबर को बंद होने वाला है। यह स्थिति छोटे और बड़े दोनों निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि आईपीओ बाजार में निवेश करते समय पूरी सावधानी और शोध आवश्यक है, ताकि संभावित जोखिमों से बचा जा सके और सही अवसरों का लाभ उठाया जा सके।