दोपहर करीब 12:30 बजे तक सेंसेक्स 1300 अंक तक टूट गया था. वहीं, निफ्टी 50 415 अंक फिसल गई थी. कारोबार के शुरुआत में ही आई इस गिरावट से निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा. आइए जानते हैं, निवेशकों को हुए नुकसान और इस गिरावट के पीछे की वजह के विषय में विस्तार से.,
2 अप्रैल, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच अंत में मामूली तेजी रही. शुरुआती बड़ी गिरावट (सेंसेक्स ~1,400 अंक) के बाद, बाजार ने रिकवरी की और सेंसेक्स 185 अंक बढ़कर 73,319 पर, जबकि निफ्टी 33 अंक चढ़कर 22,713 पर बंद हुआ। आईटी और रियल्टी शेयरों ने रिकवरी में मदद की.
शेयर बाजार में आई गिरावट का असर निवेशकों पर साफ देखने को मिला. जहां शुरुआती कारोबार में ही करीब 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 412 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा हैं.
1. शेयर मार्केट में आई गिरावट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है. ट्रंप ने मिडिल ईस्ट को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत दिए हैं. जिससे वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है.
उन्होंने इशारा दिया कि आने वाले कुछ हफ्तों में ईरान पर बड़ा हमला हो सकता है. जिससे वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने की आशंका ने मार्केट के मूड को खराब करने का काम किया है.
2. पिछले कुछ दिनों से विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं. ताजा आंकड़ों के अनुसार, बुधवार के कारोबारी दिन भी विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की.
इस दौरान करीब 8,331 करोड़ रुपये की निकासी की गई. लगातार 22 ट्रेडिंग सेशनों से विदेशी निवेशक स्टॉक मार्केट से पैसा निकाल रहे हैं. जिसकी वजह से शेयर बाजार को सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है.
3. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी गुरुवार को 6 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है. कीमतें करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी 5 प्रतिशत से अधिक उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया. कच्चे तेल में आए उबाल से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है.
4. वैश्विक बाजारों से मिल रहे संकेतों से भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई. घरेलू बाजार समेत एशियाई बाजार लुढ़क गए. जापान का निक्केई 2 फीसदी से ज्यादा गिर गया. वहीं, दक्षिण कोरिया का कोस्पी में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.
इसके अलावा चीन और हांगकांग के बाजार भी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसल गए. इन संकेतों की वजह से निवेशकों ने सतर्क होकर फैसले लिए हैं. जिससे शेयर बाजार में यह कमजोरी दिख रही है.
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