संख्या ठीक है, लेकिन बाजार की हालत उतनी मजबूत नहीं दिखती. देश के अंदर जो खरीदारी होती है, उससे टैक्स उतना नहीं बढ़ पाया, जितनी उम्मीद थी. दिसंबर में देश के अंदर के लेन-देन से GST करीब 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा. इसमें खास तेजी नहीं दिखी. इसके उलट, बाहर से आने वाले सामान पर सरकार को अच्छा टैक्स मिला. आयात से GST करीब 52 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया. कुल मिलाकर कहें तो आयात ने कलेक्शन को संभाल लिया.
अगर अप्रैल से दिसंबर 2025 तक देखें, तो GST से कुल करीब 16.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए. यह पिछले साल से ज्यादा है. पिछले साल GST ने रिकॉर्ड बनाया था. पूरे साल में 22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा टैक्स जमा हुआ था. यानी लंबे समय में सिस्टम मजबूत हुआ है, बस कुछ महीनों में सुस्ती दिख रही है.
इस महीने सरकार ने GST रिफंड भी ज्यादा दिया. करीब 29 हजार करोड़ रुपये वापस किए गए. रिफंड के बाद सरकार के पास जो GST बचा, वह करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये रहा. इसमें बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह मामूली है.
इस बार सेस से होने वाले रेवेन्यू में भी काफी कमी आई है. पिछले साल दिसंबर में जहां 12,000 करोड़ रुपये जमा हुए थे, वहीं इस बार यह घटकर करीब 4,000 करोड़ रुपये हो गया है.सितंबर 2025 में कई चीजों पर GST कम किया गया था. करीब 375 सामान सस्ते हुए. लोगों को राहत मिली.
लेकिन टैक्स घटने से सरकार की कमाई पर असर पड़ना तय था. अब सेस भी सिर्फ तंबाकू जैसे कुछ सामानों पर ही लिया जा रहा है. इससे भी कलेक्शन कम हुआ. जानकारों का कहना है कि यह सुस्ती ज्यादा समय नहीं रहेगी. जैसे ही बाजार में खर्च बढ़ेगा, GST कलेक्शन भी सुधर सकता है. फिलहाल तस्वीर यही है कि दिसंबर में सरकार को राहत तो मिली, लेकिन घरेलू खर्च अब भी कमजोर बना हुआ है.