अमरनाथ.
सालाना अमरनाथ यात्रा को शुरू हुए अभी पहला हफ्ता ही बीता है, लेकिन बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए एक परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है. पवित्र अमरनाथ गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग यात्रा के शुरुआती 5 दिनों में ही लगभग पूरी तरह से लुप्त यानी अंतर्ध्यान हो गया है. जानकारों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इसके पीछे बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग और पवित्र गुफा के आसपास इंसानों की अत्यधिक आवाजाही से पैदा हुई गर्मी जिम्मेदार है. पिछले तीन सालों से ये देखा जा रहा है कि पवित्र हिमलिंग एक हफ्ते से ज्यादा समय तक नहीं टिक पा रहा है.
3 जुलाई 2026 से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा के महज पांच दिन बाद ही प्राकृतिक हिमलिंग लगभग पूरी तरह से पिघल गया है。 हालांकि इस दौरान 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं, लेकिन समय से पहले हिमलिंग का अंतर्ध्यान होना वैज्ञानिकों और भक्तों के बीच चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है.
इस वर्ष पवित्र हिमलिंग के इतनी जल्दी पिघलने के पीछे मुख्य रूप से श्रद्धालुओं की भारी भीड़, गुफा के अंदर तापमान में वृद्धि और श्रद्धालुओं की सांसों की गर्मी को कारण माना जा रहा है。 हालांकि, बर्फ का यह प्राकृतिक शिवलिंग मौसम और तापमान के अनुसार अपना आकार लेता है, लेकिन इस बार बढ़ती भीड़ और पर्यावरण के प्रभाव से यह प्रक्रिया काफी तेज हो गई.
अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों से जब इस बारे में बात कई गई तो उन्होने इस स्थिति को प्राकृतिय प्रकिया का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया. लेकिन कश्मीर के पर्यावरणविदों का मानना है कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति देना इसका सबसे बड़ा कारण है. उनका कहना है कि लाखों भक्तों की गर्म सांस हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है और श्राइन बोर्ड के अधिकारी भी यह मानते हैं लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की. साथ ही हिमलिंग के पिघलने से रोकने के लिए किए गए सभी उपाय भी इनको नाकाफी साबित हुए.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 23 मई को अमरनाथ हिमलिंग का आकार 7 फीट का था. 29 जून को 5 फीट का रह गया और अब मंगलवार को आई नई तस्वीरों से जानकारी मिली है कि शिवलिंग पूरी तरह से पिघल गए हैं. यह कोई पहली बार नहीं है कि हिमलिंग तेजी से पिघर रहा है, बल्कि पिछले कई सालों से ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है. लगातार बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ऐसी स्थिति बन रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ ग्लेशियरों से घिरा हुआ है और ज्यादा लोगों के वहां पहुंचने से तापमान में अधिक वृद्धि हो जाती है, जिससे ग्लेशियर पिघलने लगते हैं. साल 2016 में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी. यात्रा के महज 10 दिन में ही हिमलिंग पिघल गया था. वहीं साल 2013 में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी, यात्रा खत्म होने से पहले ही हिमलिंग अंतर्ध्यान हो गए थे.