राजेश जैन दद्दू
इंदौर.
आगामी जातिगत जनगणना 2027 को लेकर जैन समाज में फैले भ्रम को दूर करने के लिए धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के राकेश गोहिल, मयंक जैन एवं वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने सकल जैन समाज से विनम्र अपील जारी करते हुए कहा है कि भारत वर्षीय जैन समाज बंधु किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं।
क्या लिखना है? सीधा और स्पष्ट -
- - धर्म के कॉलम में - सिर्फ और सिर्फ "जैन" लिखें।
- - जाति के कॉलम में - अपनी वास्तविक उपजाति लिखें।
जैसे-दशाहुमड़, पोरवाल, खंडेलवाल, परवार, अग्रवाल, गोलालारे, ओसवाल, श्रीमाल, पल्लीवाल, बघेरवाल आदि, जो भी आपकी जाति हो, वही लिखवाएं।
भारतवर्षीय शीर्षस्थ संस्थाओं के सभी पदाधिकारियों से भी यही आग्रह है कि वे समाज को यही समझाएं - जाति के कॉलम में दशाहुमड़, पोरवाल, खंडेलवाल, परवार, अग्रवाल लिखवाएं और धर्म के कॉलम में सिर्फ जैन लिखवाएं। तभी हमारी सही गणना होगी।
उदाहरण से समझिए -
जैसे हिंदू धर्म है, तो हिंदू भाई जाति के कॉलम में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, दलित आदि लिखते हैं, वो जाति के कॉलम में "हिंदू" नहीं लिखते। उसी प्रकार मुस्लिम, ईसाई, सिख भाई भी जाति के कॉलम में अपना धर्म नहीं लिखते।
तो हम जैन क्यों लिखें?
गुरु भगवंतों ने क्यों मना किया जाति में जैन लिखने से?
राजेश जैन दद्दू ने चिंतन के बाद इसका कारण स्पष्ट करते हुए कहा - "हमारे सभी गुरु भगवंतों, आचार्य संतों ने भी जाति के कॉलम में जैन लिखने से मना किया है। मैंने चिंतन किया तो पाया कि इसके पीछे एक बड़ी साजिश हो सकती है। कुछ लोग चाहते हैं कि हम जाति के कॉलम में जैन लिखें, ताकि वे बाद में यह तर्क देकर कि 'जैन कोई धर्म नहीं, बल्कि एक जाति है, धर्म तो हिंदू है' — ऐसा साबित करके हमारी पूरी गणना हिंदुओं में करवा दें।" इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपनी स्वतंत्र पहचान को बनाए रखें।
करबद्ध निवेदन -
राजेश जैन दद्दू, प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी, इंदौर ने सकल जैन समाज से करबद्ध निवेदन किया है कि -"धर्म के कॉलम में जैन और जाति के कॉलम में अपनी उपजाति - दशाहुमड़, पोरवाल, अग्रवाल आदि ही लिखें। इसी से हमारा अस्तित्व और हमारी सही संख्या सुरक्षित रहेगी।"
- निवेदक - राजेश जैन दद्दू (प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी, इंदौर), राकेश गोहिल, मयंक जैन (राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ), डॉ. जैनेन्द्र जैन (वरिष्ठ समाजसेवी)