एप डाउनलोड करें

श्रीमती मेनका गांधी द्वारा मयूर पिच्छी के सम्बन्ध में सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक एवं तथ्यहीन वक्तव्य टिप्पणी से पूरा जैन समाज आहत

इंदौर Published by: Sunil Paliwal-Anil Bagora Updated Mon, 29 Jun 2026 11:04 PM
विज्ञापन
Follow Us
विज्ञापन

वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अहिंसा उपकरण मयूर पिच्छी पर मेनका गांधी के अनर्गल प्रलाप के विरुद्ध इंदौर कमिश्नर को  ज्ञापन दिया

माफी नही मांगी तो समाज करेगा वैधानिक कार्यवाही ओर आंदोलन

Sunil Paliwal-Anil Bagora

इंदौर. श्रीमती मेनका गांधी द्वारा दिगम्बर जैन धर्म, दिगम्बर जैन साधु-संत परम्परा की पवित्र धार्मिकता प्रतीक मयूर पिच्छी के सम्बन्ध में सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक एवं तथ्यहीन वक्तव्य द्वारा की गई टिप्पणी से पूरा जैन समाज आहत हुवा है इसके विरोध में कमिश्नर कार्यालय इंदौर पर दिगम्बर जैन समाज सामाजिक संसद, दिगम्बर जैन महासमिति, तथा भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी मध्यांचल के पदाधिकारी सदस्यों द्वारा ज्ञापन दिया गया।

मांग की गई कि वह जैन संतो से व जैन समाज से माफी मांगे। अन्यथा अतिशीघ्र कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इस अवसर पर सामाजिक संसद के पूर्व अध्यक्ष श्री कैलाशजी वेद, कार्यध्यक्ष सुरेन्द्र जैन बाकलीवाल, महामंत्री देवेन्द्र सोगानी, संगठन मंत्री जैनेश झांझरी, तीर्थ क्षेत्र कमेटी मध्यांचल अध्यक्ष डी.के.जैन, महासमिति सम्भागीय अध्यक्ष वीरेन्द्र बड़जात्या, प्रवीण पाटनी, महावीर बैनाड़ा, आनन्द कासलीवाल, प्रमोद पापड़ीवाल, ऋषभ पाटनी, कैलाश सेठी, निलेश सेठी, सुदीप जैन, मुकेश दोशी, दिलीप लुहाड़िया, मयंक जैन, आलोक जैन, सुनील जैन ईशान, जितेंद्र बड़जात्या आदि बड़ी संख्या में समाजजन की उपस्तिथि में ज्ञापन दिया गया।

  • मयूर पिच्छी के मुख्य बिंदु : अहिंसा का प्रतीक: दिगंबर संत इसका उपयोग जमीन या बैठने के स्थान को धीरे से साफ़ करने के लिए करते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि अनजाने में भी किसी सूक्ष्म जीव (कीड़े-मकोड़े) को नुकसान न पहुँचे.

प्राकृतिक उत्पत्ति : पिच्छी बनाने के लिए कभी भी मोर को नुकसान नहीं पहुँचाया जाता है। यह उन मोरपंखों से बनाई जाती है जो मोर अपनी स्वाभाविक प्रक्रिया में स्वयं गिरा देते हैं.

संयम का परिचय : यह दिगंबर साधुओं के अपरिग्रह (संपत्ति न रखने) और करुणा के व्रत का एक प्रमुख अंग है.

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next