इंदौर. वेद हमारी भारतीय सनातन संस्कृति के महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, जो नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़कर उन्हें एक शालीन और सुसंस्कृत नागरिक बनाने में सक्षम हैं। हमारे वेदों में इतना अथाह खजाना छुपा हुआ है कि हमारी कई पीढियां इस धरोहर को आत्मसात कर परिवार, समाज और राष्ट्र का नवनिर्माण कर पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पताका फहरा सकती है।
ये दिव्य विचार हैं संभाजी नगर महाराष्ट्र से आए वेदमूर्ति पं. गौरव जोशी एवं वेदमूर्ति पं. पुष्पक शुक्ला के, जो उन्होंने रामबाग स्थित गणपति मंदिर पर श्री शुक्ल यजुर्वेदीय याज्ञवल्क्य संस्था इंदौर के तत्वावधान में फागुन शुक्ल पंचमी पर याज्ञवल्क्य जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित शुक्ल यजुर्वेद संहिता पारायण में शुभारंभ सत्र के दौरान व्यक्त किए।
वेदमूर्ति द्वय ने यजुर्वेद की विभिन्न ऋचाओं का सस्वर एवं शास्त्रोक्त विधि से पाठ कर उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्मोहित बनाए रखा। प्रारंभ में संस्था की ओर से अध्यक्ष पं. उपेन्द्र जोशी, सचिव पं. तुषार जोशी गुरुजी एवं अन्य पदाधिकारियों ने विद्वान द्वय का स्वागत किया। वेद पाठ का यह दिव्य और अनूठा आयोजन रामबाग स्थित गणपति मंदिर पर 22 फरवरी को भी दोपहर 2 से सायं 6 बजे तक जारी रहेगा।