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Indore City : लोकायुक्त के नोटिस से इन्दौर नगर निगम के जनकार्य विभाग में मचा हडक़ंप

इंदौर Published by: paliwalwani Updated Wed, 18 Mar 2026 11:52 AM
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अब लोकायुक्त करेगा कार्रवाइ,जांच शुरू...!

- लपेटे में आएगे,अब लापरवाही करने वाले जिम्मेदार,जांच अधिकारी सेगर,राठौर का तबादला हुआ...लता लोधी रिटायर्ड हुए

इन्दौर मेट्रो। सोनू पवार...

इन्दौर. मरीमाता चौराहे पर हुए गैस कांड की जांच लोकायुक्त ने एक शिकायत के बाद अब शुरू कर दी है...मिली जानकारी के अनुसार लोकायुक्त ने मौजूदा अधीक्षण यंत्री श्रीकांत काटे को नोटिस जारी कर जानकारी मांगी है। जो फिलहाल लोकायुक्त को मिली नहीं है,इसपर अब लोकायुक्त फिर पत्र जारी कर सकता है।

बता दें कि मरीमाता के पास हुए गैस कांड को 3 साल हो गए है। हैरत इस बात की है कि इस कांड की जांच 3 साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले की कागजी जांच में किसी पर आंच तक नहीं आई हैं। वैसे ये कोई हैरत की बात नहीं कलेक्टर कार्यालय में ऐसी कई जांचे है, जो शुरू तो हुई, लेकिन इसी तरह अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाई है। दूसरी ओर  इसमें पूरी तरह प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही और अनदेखी साफ देखी जा सकती हैं।

घटना के बाद कलेक्टर ने जो आदेश दिया था। उसमें साफ-साफ लिखा था कि सात दिन में जांच समिति, जांचकर विस्तृत प्रतिवेदन सात दिन में प्रस्तुत करें। इस आदेश को भी और दरकिनार कर उल्लेखित सात दिवस की समयावधि में पूरा ना कर जिम्मेदार जांच दल घोलकर पी गया और कलेक्टर के आदेश को धत्ता बताते हुए। सात दिन की जांच को घटना के 18 दिन में पूरी कर जांच रिपोर्ट भेज आगे कार्रवाई  करना भूल गए।

इससे पहले कि मामले में जिम्मेदारों और जांच अफसरों पर कार्रवाई होती। कलेक्टर का तबादला हो गया। उनकी जगह आशीष सिंह ने आकर इन्दौर कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाली। आशीषसिंह के आने से लगा था कि इलैया राजा टी जो उस दौरान कलेक्टर थे। उनके द्वारा जारी आदेश, निर्देशों का आशीषसिंह आसानी से जिम्मेदारों से पालन करवा लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इलैया राजा के जाने के बाद उनका आदेश और उनके आदेश पर हुई जांच रिपोर्ट। सबकुछ अब तक कागजों में धूल फांक रहे है।  अब कलेक्टर शिवम वर्मा है,पर हैरत की बात है...कार्रवाई अब भी नहीं हो रही है। 

  • - 3 कलेक्टर भी नहीं कर सके 3 साल में कार्रवाई,मामला अब भी लटका

लगता है,प्रशासन नहीं चाहता है कि इस भयंकर कांड के जिम्मेदारों को सजा मिलें या उन पर कोई कार्रवाई हो। दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि किस तरह इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद जिम्मेदारों को छोड़ दिया गया है। ना तो कोई जुर्माना लगा, ना कंपनी पर किसी तरह की प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। इस घटना के बाद कागजों ने सच्चाई की परतों को खोला तो हकीकत आश्चर्यजनक थी। जिस कंपनी ने पाइप लाइन डाली थी और जिस कंपनी की खुदाई के कारण गैस की पाइप लाइन फूटी। इन दोनों ही कंपनियों ने किसी तरह की अनुमति नगर निगम से नहीं ली थी। इसका खुलासा खुद नगर निगम ने अनुविभागिय अधिकारी के सवाल के जवाब में किया हैं। 

  • - मई 2023 केस में 2026 तक कार्रवाई नहीं,सवाल क्यों

दरअसल मई 2023 को तडक़े चार बजे जब लोग गहरी नींद में थे तो एक धमाके से उनकी नींद खुली। घबराए लोग घरों से बाहर निकले तो मरीमाता चौराहा के पास गैस लीक होने के कारण आग की लपटे उठती देखी। यह लीकेज अवंतिका पीएनजी गैस पाइप 

कंपनी की लाइन में हुआ था। जिस जगह गैस का रिसाव हुआ। वहां पर टाटा टेलिकॉम कंपनी द्वारा अपनी लाइप बिछाने के लिए जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। वो भी बगैर किसी सूचना के इधर  जेसीबी के पंजे से अवंतिका कंपनी की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हुई और गैस का रिसाव शुरू हुआ। सब मौके से भाग गए 

  • -विधायक गोलू शुक्ला को मुआवजा देकर दोनों कंपनी बची

अवंतिका, टाटा के पास कोई अनुमति नहीं,गैस रिसाव से हुए धमाके के बाद विधायक गोलु शुक्ला ने अपना नुकसान होने का दावा किया। बताते हैं कि इसके बाद उन्हें इसका भारी मुआवजा भी दे दिया गया, लेकिन इस घटना के जिम्मेदारों पर कार्रवाई के नाम पर एक कदम तक नहीं उठाया गया। मामले ने तुल पकड़ा तो कलेक्टर ने इस पूरे मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी अनुभाग मल्हारगंज को दी। यह आदेश तत्कालीन कलेक्टर ईलैया टी राजा ने 5 जून को दिए थे। कलेक्टर ने इस जांच के लिए सख्त निर्देश दिए थे लेकिन इसकी जांच में भी देरी की गई। अधिकारी को जांच रिपोर्ट बनाने में 18 दिन लगे और 23 जून को रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उसके बाद से आगे कार्रवाई नहीं हुई..?

  • -निगम के जनकार्य विभाग के पास रिकॉर्ड नहीं

दस्तावेजों और अनुमतियों को लेकर नगर निगम का जनकार्य विभाग कितना लापरवाह है, इसका खुलासा भी इस कांड की जांच में हुआ है। दरअसल नगर निगम के इस विभाग के पास अवंतिका कंपनी द्वारा ली गई अनुमति का कागज ही नहीं है। इसका खुलासा सूचना के अधिकारी में मांगी गई जानकारी से हुआ है। अनुमति का पत्र उपलब्ध कराए जाने के सवाल के जवाब में तत्कालीन अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी भी लापरवाह नजर आए इस संबंध में कागज विभाग को प्राप्त होने के बाद उपलब्ध कराएंगे।

इससे साफ होता है कि विभाग के पास कंपनी की अनुमति का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। जबकि कंपनी ने दावा किया था कि हमने नगर निगम ने से अनुमति ली है और नगर निगम ने हमें अनुमति दी हैं, लेकिन कंपनी ने भी कहीं भी अनुमति का कागज उपलब्ध नहीं कराया है। दूसरी ओर टाटा टेलिकॉम कंपनी ने भी दावा किया था कि हमारे पास खुदाई की अनुमति है, लेकिन इसके जवाब में भी नगर निगम ने अनुमति पत्र में जवाब दिया है कि दोनों ही कंपनियों को अनुमति नहीं दी गई है।

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