एप डाउनलोड करें

हिंदुओं पर अत्याचार अस्वीकार्य हैं; भारत सरकार को बांग्लादेश के मुद्दे पर ठोस कदम उठाने चाहिए : श्री परमानंद तोलानी निर्दलीय नेता

इंदौर Published by: paliwalwani Updated Wed, 24 Dec 2025 12:58 AM
विज्ञापन
Follow Us
विज्ञापन

वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इंदौर.

किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा मानवाधिकारों का मूल आधार होती है। हाल के वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के विरुद्ध हिंसा, धार्मिक स्थलों को नुकसान, सामाजिक भेदभाव और असुरक्षा की घटनाएँ सामने आई हैं, जो गंभीर चिंता का विषय हैं। धर्म के आधार पर किसी भी समुदाय पर होने वाले अत्याचार न केवल अमानवीय हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मूल्यों और कानूनों के भी विरुद्ध हैं।

हिंदू समुदाय बांग्लादेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना का अभिन्न अंग रहा है। इसके बावजूद, समय-समय पर उनके खिलाफ होने वाली घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्टों में भी इस समस्या पर ध्यान आकर्षित किया गया है, जिससे इसकी गंभीरता और स्पष्ट होती है।

भारत, जो लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मानवाधिकारों के सिद्धांतों में विश्वास रखता है, इस विषय पर उदासीन नहीं रह सकता। भारत सरकार को बांग्लादेश सरकार के साथ कूटनीतिक संवाद के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वहाँ रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को पूर्ण सुरक्षा और न्याय मिले। इसके साथ ही, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी संबंधों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को संवेदनशीलता और संतुलन के साथ उठाना आवश्यक है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि इस विषय को राजनीतिक या भावनात्मक उकसावे के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाए। किसी देश की संप्रभुता का सम्मान करते हुए, मानवाधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

हिंदुओं या किसी भी समुदाय पर अत्याचार अस्वीकार्य हैं। भारत सरकार को मानवीय मूल्यों, कूटनीतिक जिम्मेदारी और क्षेत्रीय शांति को ध्यान में रखते हुए बांग्लादेश के मुद्दे पर ठोस, संतुलित और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि दक्षिण एशिया में सौहार्द, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण कायम रह सके।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next