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अवैध बाजारों में कथित घुसपैठ पर सख्ती, साप्ताहिक बाजारों पर नगर निगम शिकंजा

दिल्ली Published by: Ravindra Arya Updated Tue, 23 Dec 2025 01:19 AM
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गाजियाबाद में अवैध कारोबार, बिना सत्यापन परवासियों और बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठ के खिलाफ ठोस कार्रवाई की शुरुआत

विशेष रिपोर्ट : रविंद्र आर्य

गाजियाबाद. आसपास गाजियाबाद में वर्षों से चल रहे अवैध साप्ताहिक बाजारों, बिना लाइसेंस कारोबार और बिना पहचान सत्यापन के व्यापार करने वालों पर अब नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। महापौर सुनीता दयाल के स्पष्ट निर्देश पर नगर निगम द्वारा साप्ताहिक बाजारों में कारोबारियों के सत्यापन, सूचीकरण और दस्तावेज़ी जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसे गाजियाबाद में पहली बार इतनी ठोस और गंभीर कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

यह पहल केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या अवैध घुसपैठ, अवैध बाजार-पेठ और बिना सत्यापन परवासियों के खिलाफ चल रही मुहिम का अहम हिस्सा मानी जा रही है। इस अभियान की शुरुआत के लिए स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने महापौर सुनीता दयाल का आभार व्यक्त करते हुए इस कदम का स्वागत किया है।

अचानक नहीं, लंबे जनदबाव का परिणाम

यह कार्रवाई किसी एक दिन का फैसला नहीं है। इसके पीछे लंबे समय से चल रहा जनदबाव, व्यापारी संगठनों की लगातार मांग और ज़मीनी स्तर पर उठाए गए गंभीर सवाल हैं। गाजियाबाद के कई इलाकों में साप्ताहिक बाजारों की आड़ में—

  • अवैध कब्जे.
  • बिना लाइसेंस और बिना पहचान के व्यापार.
  • यातायात अराजकता.
  • बांग्लादेशी व रोहिंग्या की कथित अवैध घुसपैठ.
  • सुरक्षा से जुड़े खतरे.
  • तेजी से बढ़ते जा रहे थे.

जनआंदोलन, व्यापारी संगठनों और पत्रकारिता की निरंतर आवाज़ का असर : गाजियाबाद सिटी व्यापारी नेता एवं उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के महामंत्री राजू छाबड़ा, शालीमार गार्डन क्षेत्र से बीजेपी महामंत्री पप्पू पहलवान, एच.आर.डी. पिंकी भैया और पत्रकार रविंद्र आर्य द्वारा समय-समय पर यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता रहा कि :

  • साप्ताहिक बाजारों में आखिर कौन लोग कारोबार कर रहे हैं.
  • उनके पास कोई वैध लाइसेंस या पहचान है या नहीं.
  • नगर निगम और पुलिस द्वारा नियमित सत्यापन क्यों नहीं किया जा रहा.

इन्हीं सवालों और दबाव के बीच अब नगर निगम ने पहली बार स्पष्ट किया है कि खोमचे, रेहड़ी-पटरी और साप्ताहिक बाजारों के सभी संचालकों की सूची तैयार की जाएगी, और उनके दस्तावेज़ों की जांच होगी।

बांग्लादेशी-रोहिंग्या अवैध घुसपैठ के आरोपों पर सत्यापन की मुहिम

स्थानीय स्तर पर यह मांग भी लगातार उठती रही है कि कुछ साप्ताहिक बाजारों में कथित रूप से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या परवासियों की मौजूदगी की निष्पक्ष जांच हो। नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों और बिना वैध कागज़ात के कारोबार के खिलाफ होनी चाहिए।

नगर निगम ने साफ किया है कि जिनके पास वैध दस्तावेज़ नहीं होंगे, चाहे वे किसी भी क्षेत्र या पृष्ठभूमि से हों, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

कानून, व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय

यह मामला केवल व्यापार या रोजगार का नहीं, बल्कि शहर की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है। अनियंत्रित और बिना सत्यापन के चल रहे बाजारों के कारण—

  • यातायात व्यवस्था बाधित होती है.
  • स्थानीय स्थायी दुकानदारों को आर्थिक नुकसान होता है.
  • पुलिस और प्रशासन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं.

महापौर के निर्देश के बाद नगर निगम अधिकारियों का सक्रिय होना यह संकेत देता है कि अब इस समस्या को हल्के में नहीं लिया जाएगा। पहली बार दिखी ठोस प्रशासनिक इच्छाशक्ति, लगातार उठते रहे सवाल, अब मिला जवाब

गाजियाबाद में यह पहली बार है जब नगर निगम ने साप्ताहिक बाजारों पर समग्र रूप से सत्यापन, सूचीकरण और पहचान की प्रक्रिया शुरू की है। यही कारण है कि इस कदम को स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ऐतिहासिक और स्वागत योग्य पहल बताया है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमित रूप से लागू होती है, तो...

  • अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगेगी.
  • वैध कारोबारियों को संरक्षण मिलेगा.
  • गाजियाबाद की छवि एक व्यवस्थित व सुरक्षित शहर के रूप में मजबूत होगी.

जनआवाज़ और पत्रकारिता की भूमिका

यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि जब स्थानीय मुद्दों को लगातार, तथ्यात्मक और जिम्मेदारी से उठाया जाता है, जब व्यापारी संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारिता एक साथ खड़े होते हैं, तो प्रशासन को भी कदम उठाने पड़ते हैं। आज नगर निगम द्वारा की जा रही यह कार्रवाई उसी निरंतर जनआवाज़, बांग्लादेशी-रोहिंग्या अवैध घुसपैठ के खिलाफ मुहिम और सामाजिक दबाव का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है।

साप्ताहिक बाजारों में सत्यापन की यह शुरुआत केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि गाजियाबाद को अव्यवस्था, अवैध कब्जों और बिना नियंत्रण गतिविधियों से मुक्त करने की दिशा में पहला ठोस कदम है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह अभियान ज़मीन पर कानून के अनुसार, निष्पक्षता और निरंतरता के साथ कैसे लागू होता है।

फिलहाल इतना तय है : गाजियाबाद में व्यवस्था, जवाबदेही और सुरक्षा की ओर बढ़ने की शुरुआत हो चुकी है।

 

लेखक : रविंद्र आर्य

(भारतीय संस्कृति, धर्म और वैश्विक प्रतीकों पर शोध आधारित )

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