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कैलाश जी जनता वाकई 'अनपढ़' है ...

आपकी कलम Published by: paliwalwani Updated Sat, 21 Feb 2026 12:04 PM
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पोलिटिक्सवाला के संपादक Pankaj Kumar Mukaati ने कैलाश विजयवर्गीय के निरंतर बिगड़ते बोल पर सिलसिलेवार लिखा है। एक कद्दावर नेता का यह बदला रूप, बेलगाम बोल समझ से परे हैं, खास कर इंदौर के उनके प्रशंसकों के लिये भी।  

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घंटा, औकात, अनपढ़ ...

ये शब्द हैं मध्यप्रदेश के संसदीय कार्य, नागरीय निकाय मंत्री के। ये पत्रकारों के सवाल पर उनको घंटा कहते हैं।अडानी का नाम आने पर विधानसभा में  नेता प्रतिपक्ष को औकात में रहो कहते हैं। जब कोई उनकी विधानसभा में जहरीले पानी से मौत पर सवाल  करे तो कह देंगे जनता अनपढ़ है।

ये भाषा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की है जो  बच्चों को संस्कारी बनाने का ज्ञान देते हैं। जो लड़कियों के पहनावे पर सवाल उठाते है। इनकी खुद की भाषा किसी बाउंसर से कम नहीं। जुबान एक बार फिसलती है, पर बार बार लगातार ऐसी  भाषा जुबान की फिसलन नहीं वैचारिक फिसलन कही जा सकती है। ये उसी जनता को अनपढ़ कह रहे हैं जिसने इन्हे तीन दशक से सर आँखों पर बैठा रखा है। वोटो से नवाजा है।

32 मौत के बाद भी जनता कैलाश जी, कैलाश जी, कैलाश जी कहती घूमती रही है और कैलाश जी उन्हें अनपढ़ कर रहे हैं। भागीरथपुरा में 32 ज़िंदगियों के ख़तम हो जाने पर भी किसी भी आम आदमी ने मंत्रीजी को कोई गलत शब्द नहीं कहे। अब मंत्रीजी उसी जनता को अनपढ़ बता रहे हैं। यानी वोट देने वाले,

आपको सम्मान देने वाले आपकी निगाह की शरम रखने वालों को आप कुछ भी कहने को आज़ाद हैं। ये एक  से जनता को गुलाम समझने की मानसिकता है।

कैलाश विजयवर्गीय ने सिर्फ भागीरथपुरा के लोगों को सिर्फ अनपढ़ ही नहीं कहा उनके पूरे जीवनस्तर पर सवाल उठाया है। भागीरथपुरा को मुंबई की धारावी जैसा बता दिया। यहाँ के लोगों को काम में अड़ंगे लगाने वाला तक कह दिया। वे सदन में बोले ये छोटी बस्ती है, लोग अनपढ़ है। नगरनिगम तो पाइप लाइन कब से बदलना चाह रही है। पर इस बस्ती के लोगों के बीच जाकर काम करना मुश्किल है। वाकई, ये बस्ती सिर्फ वोट हासिल करने के लिए। ऐसे अनपढ़ औरकाम में अड़ंगे डालने वालों को मरने के लिए छोड़ देना चाहिए।

मान लेते हैं कैलाश जी कि भागीरथपुरा के लोग अशिक्षित हों, अनपढ़ हों, निरक्षर हों तो क्या अनपढ़ लोगों को जीने का हक नहीं। आप उन्हें मरने के लिए छोड़ देंगे। क्या आप उन्हें गटर का पानी पिलाकर मार दोगे। क्या अशिक्षित लोगों को जिंदगी का अधिकार नहीं। पहले घंटा, फिर औकात, फिर अनपढ़... कैलाश जी आपको हो क्या गया। कहीं वाकई आपकी जुबान पर शनि की दशा तो नहीं चल रही या आपको दिल्ली से खबर हो गई है बदलती हुई दशा की। जिसकी खीझ आपके व्यवहार में झलक रही है। वाकई जनता अनपढ़ है कैलाश जी तभी तो उसने आपको लगातार चुन लिया। आपका वोटर है आप ज्यादा बेहतर जानते हैं।

कैलाश विजयवर्गीय ने ये कहा सदन में-

  • मुंबई की धारावी से भागीरथपुरा की तुलना करते हुए कहा कि ये 90 साल पुरानी बस्ती है। यहां अशिक्षित लोग रहते हैं, जहां काम करना नगर निगम कर्मचारियों के लिए मुश्किल होता है। इसी कारण कर्मचारी ठीक तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे। महापौर ने टेंडर जारी किए थे, लेकिन काम समय पर शुरू नहीं हो पाया।
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