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सब ऊँ बढ्यां मौत कसी " राजेन्द्र सनाढ्य राजन

आपकी कलम Published by: paliwalwani Updated Tue, 09 Jun 2026 10:45 PM
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अणी दुनियाँ मा रोज, 

लाखों मनख मरीरा, 

कोई कसी मौत मरीरा, 

कोई कसी मौत मरीरा। 

कोई गंडका जूँ अठै, 

हड़- हड़ न मरीरा, 

कोई कीड़ा-मकोड़ा जूँ, 

पट- पट मरीरा। 

कोई गेंडा हाथी जूँ, 

खाई- खाई न मरीरा , 

कोई पैईसा देख-देख न, 

वेन्डा वैई न मरीरा। 

कोई परेमिका री आद मा, 

गस खाई न मरीरा , 

कोई घरवाळी ने मार न, 

खुद गोळी खाई न मरीरा। 

कोई सज्जण मनख वण, 

ईसवर नाम रट मरीरा, 

कोई सैणिंक वण न, 

मात- भौम पे मरीरा। 

कोई मीरा जूँ मूरति मा, 

अठै समाई मरीरा, 

कोई कबीर जूँ अठै 

फूल वण न मरीरा। 

राजन अबे आप कसी, 

मौत मरणा चावों हो, 

सब ऊँ बढ्यां मौत कसी, 

किने चुणणां चावों हो। 

किने चुणणां चावों हो।। 

राजेन्द्र सनाढ्य राजन

वाइस प्रिंसिपल, राउमावि. नमाना, नि-कोठारिया, जि. राजसमंद, राजस्थान

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