अणी दुनियाँ मा रोज,
लाखों मनख मरीरा,
कोई कसी मौत मरीरा,
कोई कसी मौत मरीरा।
कोई गंडका जूँ अठै,
हड़- हड़ न मरीरा,
कोई कीड़ा-मकोड़ा जूँ,
पट- पट मरीरा।
कोई गेंडा हाथी जूँ,
खाई- खाई न मरीरा ,
कोई पैईसा देख-देख न,
वेन्डा वैई न मरीरा।
कोई परेमिका री आद मा,
गस खाई न मरीरा ,
कोई घरवाळी ने मार न,
खुद गोळी खाई न मरीरा।
कोई सज्जण मनख वण,
ईसवर नाम रट मरीरा,
कोई सैणिंक वण न,
मात- भौम पे मरीरा।
कोई मीरा जूँ मूरति मा,
अठै समाई मरीरा,
कोई कबीर जूँ अठै
फूल वण न मरीरा।
राजन अबे आप कसी,
मौत मरणा चावों हो,
सब ऊँ बढ्यां मौत कसी,
किने चुणणां चावों हो।
किने चुणणां चावों हो।।
वाइस प्रिंसिपल, राउमावि. नमाना, नि-कोठारिया, जि. राजसमंद, राजस्थान