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मध्य प्रदेश के अधिवक्ता मित्रों और वोटर्स राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव का नोटिफिकेशन आ चुका है...!

आपकी कलम Published by: paliwalwani Updated Sat, 07 Mar 2026 12:52 AM
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मान. हाई पावर कमेटी अध्यक्ष, चुनाव अधिकारी,

चलिए कुछ महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करते हैं विगत वर्षों में राज्य अधिवक्ता परिषद में चुने गए प्रतिनिधियों का रोल ना तो न्यायपालिका के हित में रहा और ना ही वकीलों के हित में और ना ही जनता के हित में।  क्यों? 

जानते है ---

1 राज्य में अधिवक्ताओं पर आक्रमण होते रहे उनके मर्डर होते रहे उनके ऊपर अटैक किए गए और राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लाने में विफल रहे।

2 न्यायपालिका को याचिकाओं के माध्यम से बार-बार परिषद की कार्य प्रणाली पर हस्तक्षेप करना पड़ा। परिषद में चल रहे भ्रष्टाचार, भाई भतीजा बाद, परिषद के कर्मचारियों का शोषण,परिषद के चुने गए सदस्यों द्वारा अनावश्यक खर्च किया जाना जैसे बेफिजूल टीए डीए की वसूली,परिषद का ऑडिट पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से नहीं कराया गया, परिषद की आय व्यय को सार्वजनिक नहीं किया गया।

 3.सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अधिवक्ता रजिस्ट्रेशन शुल्क बिल्कुल नॉमिनल हो गया ₹1000 से भी कम राशि में कोई भी अधिवक्ता अपना पंजीयन वकालत के व्यवसाय में आने के लिए करवा सकता है और उन्होंने इस बात का कोई चेक पॉइंट नहीं बनाया की आज मध्य प्रदेश में अधिवक्ता सूची में हजारों अधिवक्ता ऐसे शामिल हो गए हैं जो प्रैक्टिस करते ही नहीं जो व्यवसाय में है अथवा नौकरी में है जबकि अधिवक्ता अधिनियम इस बात की अनुमति नहीं देता ।

4 अधिवक्ता अधिनियम के अंतर्गत वही व्यक्ति अधिवक्ता के रूप में कार्य कर सकता  है जब वह कोई अन्य व्यवसाय और नौकरी ना करते हो इस तरह न्यायपालिका के ऊपर और जनता के ऊपर हजारों फर्जी वकीलों का बोझ बढ़ गया जिससे वास्तविक वकील और न्याय प्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई है। 

5  परिषद में बिना सेक्रेटरी के कार्य किया जा रहा था और एक याचिका में सेक्रेटरी नियुक्त करने के आदेश के बावजूद भी अभी तक फुल फ्लैश सेक्रेटरी नियुक्त नहीं किया गया जिससे अधिवक्ता परिषद के सदस्यों की नियत और उनकी कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगता है। 

6.राज्य अधिवक्ता परिषद में कभी भी पिछले 10-15 वर्षों में ऐसा कोई प्रयास नहीं किया की अधिवक्ताओं की सीनियरिटी के बेस पर उनके बैठने के लिए उचित चैंबर और हाल की व्यवस्था की जाए बल्कि कई बार याचिकाओं के माध्यम से अनाधीकृत रूप से प्रदान किए गए चैंबर के विषय में लड़ाई अधिवक्ताओं द्वारा  लड़ी गई ।

7 सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले जिसके अनुसार 25 में से 7 सदस्य महिला चुनी जानी है संबंध में चयन प्रक्रिया और चुनाव प्रक्रिया का कोई स्पष्टीकरण अभी तक हाई पावर कमेटी द्वारा जारी नहीं किया गया है जिससे अधिवक्ताओं को किस तरह वोट डालना है और वोट डालने में 7 महिलाएं भी चुनी जानी है इस संबंध में कोई भी स्पष्ट आदेश अभी तक प्रदेश की अधिवक्ताओं को नहीं दिए गए हैं अतः किस तरह से महिलाओं के प्रतिनिधित्व को राज्य अधिवक्ता परिषद में लाया जाएगा इसकी ईमानदारी पर संदेह होता है। 

8 प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह जो कि परिषद के पदेन अधिकारी होते हैं , द्वारा कभी भी उन्होंने इन मामलों में कोई संज्ञान नहीं लिया और वह वकीलों के प्रतिनिधि ना होकर पूरी तरह से राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि बन गए हैं और उनके द्वारा जिस तरह से  वकीलों की सूची जारी कर वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में शासकीय अधिवक्ताओं और पैनल लॉयर की नियुक्ति की गई यह बहुत ही गंभीर गैरकानूनी कृत्य और अन्याय पूर्ण मामला था। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका लंबित है इसके बावजूद भी मध्य प्रदेश शासन ने सूची निरस्त करने का कोई निर्णय नहीं लिया। याचिका के बावजूद भी मध्य प्रदेश शासन द्वारा हाईकोर्ट में प्रतिनिधित्व कर रहे शासकीय अधिवक्ताओं की सूची में कोई परिवर्तन किया। जिस तरह से भाई भतीजा बाद और अयोग्य लोगों को हाई कोर्ट में पैरवी करने  के लिए शासन द्वारा नियुक्त किया गया है वह है पूरी तरह से गैरकानूनी, भाई भतीजाबाद और भ्रष्टाचार पैदा कर रहा है और न्यायपालिका के ऊपर दिन पर दिन मुकदमों का बोझ पढ़ रहा है क्योंकि उनमें योग्यता की कमी है और वह सकारात्मक रूप से कोर्ट को हेल्प नहीं कर पाते अभी तक परिषद के सदस्यों ने महाधिवक्ता के निलंबन की मांग क्यों नहीं की । अतः न्याय प्रणाली और न्याय व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। 

9  महत्वपूर्ण बात है कि जिन सेवानिवृत्ति हाई कोर्ट जजों को परिषद के चुनाव की अहम जिम्मेदारी दी गई है और परिषद द्वारा जिन वकीलों को अपनी सहायता के लिए नियुक्त किया गया है उनमें निष्पक्ष,स्वतंत्र चुनाव कराने की इच्छा शक्ति की कमी दिखाई दे रही है अतः इस बात पर संदेह होता है क्या परिषद के चुनाव निष्पक्ष स्वतंत्र रूप से हो पाएंगे ।

10 चुनाव का नोटिफिकेशन आ गया और चुनाव की काउंटिंग होने में जिस तरह से दो से तीन महीने लगते हैं इस संबंध में कोई निर्णय हाई पावर कमेटी द्वारा नहीं लिया गया की सारी चुनाव की काउंटिंग की प्रक्रिया को किसी कंप्यूटर सिस्टम और सॉफ्टवेयर के माध्यम से कराया जा सकता है और चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र और काउंटिंग को एक हफ्ते में पूरा किया जा सकता है । जब करोड़ों लोगों की चुनाव भारत में एक दिन में बैलट मशीन से कराया जा सकते हैं तो फिर  परिषद के चुनाव एक दिन में क्यों मशीन से नहीं कराई जाकर और एक दिन में डिक्लेअर क्यों नहीं किया सकते यह सब बात दर्शा रही है कि जिन लोगों को भी चुनाव की जिम्मेदारी दी गई है और जो वर्तमान पदाधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं और जो वकीलों के नेता है उनकी इच्छा शक्ति, निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए दिखाई नहीं दे रही है ।

मेरा व्यक्ति का तौर पर मानना है की चुनाव से ना तो न्यायपालिका का कोई भला होने वाला है ना ही जनता का कोई भला होने वाला है और ना वास्तविक प्रैक्टिस कर रहे हैं वकीलों का भला होने वाला है क्योंकि जो वकील चुन के आने वाले हैं वह लोग होंगे जो अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए चुनाव लड़कर वकीलों के नेता बन रहे हैं या जो अपराधिक प्रवृत्ति के हैं या जो प्रेक्टिस ही नहीं करते ऐसे व्यक्तियों के चुनाव जीत के आने की संभावना बनी हुई है अतः मेरा मानना है कि इन सुझावों पर आवश्यक रूप से ध्यान देते हुए हाई पावर कमेटी को चुनाव कराने चाहिए अन्यथा  उनकी योग्यता और उनकी कार्यप्रणाली पर चुनाव के निर्णय होने के बाद प्रश्न चिन्ह लगेंगे और ऐसे में अधिवक्ता याचीकाओं के माध्यम से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में रिट लगा सकते हैं अथवा सुप्रीम कोर्ट में लगा सकते हैं जिससे सारी प्रक्रिया और मेहनत व्यर्थ हो जाएगी और इसमें सभी शामिल लोगों पर उंगली उठेगी ।

निवेदन है कि डेमोक्रेटिक लॉयरस फोरम के सचिव में रविंद्र कुमार गुप्ता और सोसाइटी फॉर लीगल एंड ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स के अध्यक्ष के रूप में आप लोगों से विनम्र निवेदन करता हूं युक्त सुझाव और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हाई पावर कमेटी चुनाव कराने का निर्णय अथवा चुनाव कराए जाए जिससे मध्य प्रदेश की न्याय प्रणाली और कार्य प्रणाली में कुछ मूलचूल परिवर्तन आ सके ।

रविन्द्र गुप्ता 

9424310981

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