कहा छुपें हो प्यारे कन्हैया तेरे द्वार खड़े भगवान
M. Ajnabee, Kishan paliwal
आमेट. नगर के रेलवे स्टेशन जलदाय विभाग के सामने महाकालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही, आठ दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पंडित कन्हैयालाल शर्मा भागवत कथा करते हुए संक्षेप में महाभारत की कथा सुनाते हुए राजा शांतनु का गंगा जी से विवाह देवव्रत का जन्म से कौरव पांडव के जन्म तक की कथा सुनाई.
जब दुर्योधन को नारद ने बताया कि उसकी मृत्यु भीम के द्वारा होगी तो दुर्योधन पांडवों से द्वेष रखने लगा. हमें कभी अपने भाइयों से द्वेष नहीं रखना चाहिए. जिसका परिणाम बहुत बुरा होता है. इसी दृष्ट से भीम को दुर्योधन ने जहर दिया. भीम को गंगा जी में डाला गया. भीम का विवाह पाताल में नाग कन्या के साथ हुआ.
अगर कोई कन्या यदि सुंदर वर चाहती है तो भगवान शिव को महामृत्युंजय मंत्र के साथ गंगाजल गाय का दूध गुड़ आदि से तर्पण करना चाहिए. तत्पश्चात लाक्षागृह की कथा सुनाई. दुर्योधन के द्वारा युधिष्ठिर का जुए मैं हराना द्रोपदी के चीरहरण की कथा भगवान कृष्ण के द्वारा द्रोपती का चीर बढ़ाना संकट के समय में भगवान की शरण में जाना चाहिए.
राजा बलि,वामन भगवान के अवतरण की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान वामन ने तीन पैर जमीन मांगी और तीसरा पेर राजाबली के सीने पर रखकर उसे पाताल लोग का राजा बना दिया. इस प्रकार वामन भगवान की पूजा की विधि बताई. कथा में व्यासपीठ द्वारा भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना.
कहां छुपे हो प्यारे कन्हैया तेरे द्वार खड़े भगवान
आदि भजनों की प्रस्तुति देकर कथा पांडाल में उपस्थित सभी भक्तगण नाचने को मजबूर हो गए. इस दौरान गंभीर सिंह राठौड़, भगवत सिंह राठौड़, पृथ्वीराज सेन, मधु शर्मा, अनिल मेवाड़ा, मदन सिंह, जितेंद्र सिंह पंवार, मनोहरसिंह पंवार, महेंद्रसिंह सोलंकी, विजयपाल सिंह, विनोद शर्मा, केशव भाई मेवाड़ा, शंभू सिंह देवड़ा, भगवती लाल आमेटा, गब्बर सिंह राठौड़, सोहन लाल, सूरज सिंह राठौड़, जीत कंवर ओमप्रकाश, जगदीश मेघवाल, कैलाश शर्मा सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष मौजुद थे.
दूसरे दिवस पर कथा वाचक कर्म का लेखा कभी मिटता नहीं
नगर के महाकालेश्वर मन्दिर जलदाय विभाग आमेट में जन कल्यार्णाथ जनसहयोग से चल रही 8 दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिवस पर कथा वाचक कन्हैयालाल शर्मा भागवत वृष्टान्त में धुन्धकारी व नारद मुनि का वृतान्त प्रसंग सुनाया. नारद जी भगवान विष्णू के दुसरे अवतार है. एवं कर्म का लेखा-जोखा के बारे में बनाते हुए कहा की हम जैसे कर्म करते है. उसका परिणाम भी वैसा ही मिलता है. जो अच्छे कर्म करता है. अच्छा परिणाम मिलता ही है एवं माता-पिता की सेवा करने से मनुष्य संरकार वान होकर अपने परिवार गांव राज्य एवं देश का नाम ऊंचा करता है. इसलिए हम सभी को अपने माता पिता की सेवा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. मोबाईल के बारे मे बताते हुए कहा कि सभी भक्तजनों को सप्ताह में एक दिन मोबाईल उपभोग का अवकाश रखने को कहा गया. जिससे आपका शान्त रहेगा, जिससेे आप रोज की आपा धापी से रिलेक्स महसुस करेंगे. कथा सायः 7 बजे शुरू होकर रात्री 10 बजे तक चली. अन्त में भागवत की आरती के साथ समापन किया गया. कथा में भगवत सिंह राठौड, पृथ्वीराज सेन, विनोद कुमार शर्मा, अनिल कुमार मेवाड़ा, गम्भीर सिंह राठौड, दीपक सिंह चौहान, सूरज सिंह राठौड़, वीनू शर्मा, निर्मला शर्मा सहित नगर के कई महिला पुरुषों ने भाग लेकर भागवत कथा का श्रवण किया.