M. Ajnabee, Kishan paliwal
आमेट. क्षेत्र के राउमावि सियाणा में ग्रीष्मकालीन भारतीय भाषा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में आसपास के गांवों से लगभग 75 विद्यार्थियों ने भागीदारी निभाई और भारतीय भाषाओं के साथ मातृभाषा मेवाड़ी के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की।
प्रशिक्षण शिविर के प्रभारी प्राध्यापक पारसमल जाट ने बताया कि शिविर के दौरान विद्यार्थियों को भाषा कौशल के सूत्र, शब्दावली निर्माण, आत्म परिचय, वास्तविक जीवन की बातचीत का अभ्यास, संस्कृति की सराहना, सुदृढ़ीकरण तथा आत्मविश्वास निर्माण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
शिविर के दौरान सभी विद्यार्थियों ने मातृभाषा मेवाड़ी में "पहली-पोथी" पुस्तक की सहायता से एक प्रोजेक्ट भी तैयार किया, जिससे भाषा के व्यावहारिक ज्ञान और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण शिविर को सफल बनाने में व्याख्याता करण सिंह राव, रोशनलाल सरगरा, हरीश पालीवाल, सुरेंद्र शर्मा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।ग्रीष्मकालीन भारतीय भाषा प्रशिक्षण शिविर ने विद्यार्थियों में भाषा दक्षता, सांस्कृतिक जागरूकता और आत्मविश्वास विकसित करने के साथ मातृभाषा मेवाड़ी के प्रति जुड़ाव को भी सुदृढ़ किया।