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आमेट

Amet News : श्रीमद्भागवत कथा सुनने उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

📅 26 May 2026, 12:53 AM • ✍️ M. Ajnabee, Kishan paliwal • ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
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Amet News : श्रीमद्भागवत कथा सुनने उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
Amet News : श्रीमद्भागवत कथा सुनने उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

M. Ajnabee, Kishan paliwal

आमेट. नगर स्थित मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर के संत नन्दा दास महाराज की 24 वर्ष की धूणी शान्ति तपस्या पूर्ण होने के उपलक्ष में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में चित्रकूट के युवराज कृष्ण महाराज द्वारा कथा के चतुर्थ दिवस की कथा में महाराज  ने अनेक प्रेरणादायक एवं दिव्य प्रसंगों का अत्यंत सुंदर वर्णन किया।

कथा के प्रारंभ में जड़ भरत जी की कथा सुनाते हुए बताया कि मनुष्य को संसार की मोह-माया में आसक्त नहीं होना चाहिए। महाराज  ने कहा कि जड़ भरत जी ने वैराग्य, भक्ति और आत्मज्ञान के माध्यम से संसार को यह संदेश दिया कि भगवान की भक्ति ही जीवन का वास्तविक आधार है।

इसके पश्चात महाराज पृथु की कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए बताया गया कि एक आदर्श राजा का जीवन कैसा होना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि राजा पृथु ने अपनी प्रजा के कल्याण के लिए संपूर्ण जीवन समर्पित कर धर्म, न्याय एवं सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया।

कथा में वृत्तासुर प्रसंग का भी अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। महाराज श्री ने बताया कि बाहरी रूप से असुर प्रतीत होने वाला वृत्तासुर भीतर से भगवान का महान भक्त था। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति मनुष्य के हृदय की पवित्रता में होती है, न कि बाहरी स्वरूप में इसके बाद समुद्र मंथन की दिव्य कथा का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने देवताओं और दैत्यों द्वारा किए गए मंथन का आध्यात्मिक रहस्य समझाया।

कथा में चौदह रत्नों की उत्पत्ति, भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य एवं अमृत प्राप्ति के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।भगवान वामन देव की कथा में महाराज श्री ने राजा बलि के त्याग, दानशीलता और भगवान के प्रति समर्पण का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान ने वामन रूप धारण कर भक्तों की रक्षा एवं धर्म की स्थापना का संदेश दिया।

भक्त प्रह्लाद की अमर भक्ति का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिसने भगवान का नाम नहीं छोड़ा, वही सच्चा भक्त कहलाता है। प्रह्लाद चरित्र से बच्चों एवं युवाओं को धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। कथा के दौरान श्री राम कथा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, सत्य एवं धर्मपालन के प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।

इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य एवं संगीतमय आयोजन हुआ। जैसे ही व्यासपीठ से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, पूरा कथा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नृत्य एवं भजन-कीर्तन के साथ कृष्ण जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास से मनाया।

सायंकाल आयोजित इस कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा के साथ भजन संध्या एवं संगीतमय प्रस्तुतियों ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए सुंदर व्यवस्थाएं की गई हैं।

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