सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ : जनवादी लेखक संघ, इंदौर के अध्यक्ष रजनी रमण शर्मा ने अंतिम साँस ली
सुलझे विचारों वाले मित्र रजनी रमण शर्मा के निधन की खबर मेरे लिये भी पीड़ा दायी है। जनवादी लेखक संघ के इंदौर में होने वाले कार्यक्रमों में मुझे भी श्रोता के रूप में आग्रहपूर्वक निमंत्रित करते थे। एक बार जलेस के वार्षिक पुरस्कार के लिए अधिकारपूर्व मुझे निर्णायक कमेटी में भी रख लिया।अहिल्या लायब्रेरी से सटे छोटे हॉल में मीटिंग, कार्यक्रम समाप्त होने पर कचोरी का नाश्ता तो वहीं करते, फिर चाय पीने रीगल सिनेमा तिराहे पर एसपी कार्यालय से सटी चाय दुकान पर जाते थे। उनकी यादें स्मृति में रहेंगी।
इंदौर में जनवादी लेखक संघ को मजबूती से बांधे रखने वाली गठान के समान ही थे। वन मेन आर्मी की तरह अकसर सारी जिम्मेदारी खुद ही निभाते रहते थे। वे बेहतरीन रंगकर्मी-निर्देशक भी थे। उनके निधन पर भाई प्रदीप कान्त का लिखा स्मृति शेष उनके नाम-काम को बेहतर तरीके से समझाता है।
????प्रदीप कांत, इंदौर
इंदौर. जनवादी लेखक संघ, इंदौर के अध्यक्ष रजनी रमण शर्मा ने आज तड़के अपने पैतृक शहर बीकानेर में अपनी अंतिम साँस ली। रजनी रमण शर्मा साहित्य और रंगकर्म के मर्मज्ञों में से थे। राजस्थान के होने के बावजूद उनके हृदय में उत्तर राजेश, बिहार और मध्य प्रदेश की संस्कृति एक साथ धड़कती थी। साहित्य में एक उपन्यास तुम्हारे आस पास अनेक कविताएँ और आलेख के साथ आकाशवाणी से उनके ब्रज भाषा में लेखन का राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश से प्रसारण होता रहा।
राजस्थान, दिल्ली और मध्यप्रदेश के आकाशवाणी और दूरदर्शन केन्द्रों के बहुत सारे कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता महत्वपूर्ण रही है। साहित्य अकादमियों से लेकर विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के कार्यक्रमों में संचालक से लेकर सहभागी के रूप में उनको हमेशा याद किया जाएगा। उनकी आवाज में एक किस्म की कसक थी, जो श्रोताओं को बाँधकर रखती थी।
घासीराम कोतवाल, मशीन, जुलूस, पूस की एक रात, सुन लड़की दबे पांव आते हैं सभी मौसम, थैंक्यु मिस्टर ग्लाड, शम्बूक की हत्या, हम रोशनी बाँटते हैं, भस्मासुर अभी जिंदा है, अंधेर नगरी, मेघदूत, ढोला-मारू, हाउस आफ मैड, ओमार सोनार बांग्ला, रक्तदीप और नयायुग जैसे लगभग तीन दर्जन नाटकों में रजनी रमण के अभिनय को न केवल सराहा गया बल्कि बहुत सारे बेस्ट एक्टर के पुरस्कारों से उनको नवाजा भी गया। उ
नके द्वारा निर्देशित नृत्य नाटिका मेघदूत, श्री कृष्ण पारिजातम् और टोड़ो राव में उनकी रंग दृष्टि हतप्रभ कर देती है। अफसर हुसैन और अलका जी जैसे बड़े रंगकर्मियों के साथ काम करने का माद्दा रखने वाले रजनी रमण को राजस्थान संगीत नाटक अकादमी ने भी पुरस्कृत किया। वे नाटक में लेखन, अभिनय, तकनीकी निर्देशन, निर्देशन, मंच सज्जा और प्रकाश, हर विधा में प्रवीण थे। जिस विधा में भी कार्य किया वहाँ पर अपनी छाप छोड़ी।
वे 2013 से जनवादी लेखक संघ, इंदौर के अध्यक्ष थे और इस दौरान उन्होंने अनवरत 150 मासिक रचना पाठ आयोजित किए और इंदौर इकाई को देश की सक्रियतम इकाई के रूप में स्थापित किया।
Gurudev Billore
क्रिएटर द्वारा
विनम्र श्रद्धांजलि....स्वर्गीय रजनी रमण शर्मा जी से मेरी पहली मुलाक़ात " चतुरंग भारत "अखबार के दफ्तर में हुई थी। अक्सर उन्हें मैने सफ़ेद पेंट शर्ट में देखा. मुँह में पान का बीड़ा होता था। क्लीन सेव और पीछे किए बाल थोड़े बढ़े हुए रहते। इससे उनके रंगकर्मी होने का अंदाजा कोई भी लगा सकता था। भारी आवाज़ रहती, अब यह उनकी मूल आवाज़ थी या रात को ठीक से नींद नहीं होने का परिणाम। चतुरंग भारत अखबार में महेश शर्मा जी से भी मुलाक़ात हुई थी। श्री रजनी रमण शर्मा जी से मुलाक़ात को 33बरस बीत गए। उनके फोटो को देखकर उनके 33 साल पुराने चेहरे को याद करता रहा। अनुमान लगाया 33 बरस में वे मोटे नहीं हुए। उम्र के साथ चेहरा इतना तो फ़ैल ही जाता है....। बहुत याद आएँगे शर्मा जी...।
!! जनवादी लेखक संघ, इंदौर की और से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि !!
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