महाकाल कॉन्फ्रेंस में बिलों का बड़ा खेल : भोपाल से उज्जैन तक भुगतान में गड़बड़ी का आरोप...!

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उज्जैन / भोपाल.

भोपाल से उज्जैन तक भुगतान में गड़बड़ी का आरोप. महाकाल कॉन्फ्रेंस के गाड़ी बिलों में बड़ा खुलासा। मेपकास्ट ने कॉन्फ्रेंस के लिए गाड़ियां किराए पर लीं, भुगतान हुआ 57 लाख रुपए से ज्यादा.

ई-रिक्शा को इनोवा, मोपेड को ट्रैवलर बताया. बिलों में गाड़ियों के नंबरों पर सवाल. इन्वेस्टिगेशन में किराए की गाड़ियों के बिलों में कथित गड़बड़ियां सामने आईं. एक मोपेड को 24 घंटे में 38 घंटे चलते हुए दिखाने का दावा. एक गाड़ी की मीटर रीडिंग महज 25 घंटे में 22,708 किलोमीटर बढ़ने का मामला.

एक ही गाड़ी की दो-दो बार बुकिंग. अतिरिक्त ड्यूटी दिखाकर भुगतान लेने का आरोप. ट्रैवलर के नाम पर बिल बना, लेकिन नंबर उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड मोपेड का निकला. महाकाल कॉन्फ्रेंस पर कुल 6.29 करोड़ रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई. टेंट, पब्लिसिटी, कैटरिंग और ट्रांसपोर्ट के खर्चों पर सवाल—अब जांच और जवाबदेही की मांग उठ सकती है...!

सरकारी खजाने की खुली लूट बताते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

दैनिक भास्कर की एक इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट - MAPCAST) द्वारा उज्जैन में आयोजित 'महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम' कॉन्फ्रेंस में गाड़ियों के किराए के बिलों में भारी गड़बड़ी और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप सामने आए हैं. इस पूरे आयोजन पर कुल 6.29 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, जिसमें से भोपाल की एक ट्रैवल्स एजेंसी को 57 लाख रुपए से अधिक का भुगतान सिर्फ गाड़ियों के फर्जी बिलों के आधार पर कर दिया गया.

• 1 दिन में 38 घंटे की बिलिंग : एक इनोवा क्रिस्टा (MP09-TA-8278) को एक ही तारीख (5 अप्रैल) को अलग-अलग तीन बिलों में बुक दिखाया गया. पहली बिलिंग में 10 घंटे एक्स्ट्रा ड्यूटी, दूसरी में 13 घंटे और तीसरी में 15 घंटे की ड्यूटी दिखाकर एक ही दिन में 38 घंटे का भुगतान पास करा लिया गया.

• 25 घंटे में 22,708 किलोमीटर का सफर: एक टेंपो ट्रैवलर (MP09-FA9227) के बिलों में 3 अप्रैल को क्लोजिंग मीटर रीडिंग 39,616 थी, जो सीधे 5 अप्रैल की सुबह ओपनिंग रीडिंग में 62,324 दर्ज कर दी गई. कागजों पर इस गाड़ी को महज 25 घंटे के भीतर 22,708 किलोमीटर चलता हुआ दिखा दिया गया.

• एक ही गाड़ी के एक साथ दो बिल : एक ही ट्रैवलर गाड़ी (MP11-P0671) के नाम पर एक ही दिन दो अलग-अलग बिल (नंबर 3060 और 3061) बनाकर 10-10 घंटे की अतिरिक्त ड्यूटी का अप्रूवल भी अधिकारियों द्वारा दे दिया गया.

विपक्ष (कांग्रेस) और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर प्रदेश की सरकार और सुशासन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं तथा इसे सरकारी खजाने की खुली लूट बताते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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