बैंककर्मियों की देशव्यापी हड़ताल: करोड़ों का कारोबार प्रभावित, आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी

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शुक्रवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर देश के विभिन्न हिस्सों में बैंककर्मी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। सप्ताह में पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली लागू करने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हरदा जिले में भी लगभग 197 कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया, जिससे जिले की 47 राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। कर्मचारियों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर और काले झंडे लेकर प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शहर में एक विशाल बाइक रैली भी निकाली गई, जिसके माध्यम से उन्होंने अपनी मांगों को सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया। इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ा, क्योंकि नकद जमा-निकासी, चेक संबंधी कार्य और अन्य काउंटर सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं। अनुमान है कि अकेले हरदा जिले में ही करीब 350 करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं, लेकिन शाखाओं में जाकर होने वाले आवश्यक कार्यों के लिए ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति

बैंक कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था लागू करना शामिल है। मध्यप्रदेश बैंक एम्पलाईज एसोसिएशन के सचिव नीलेश भाटी ने बताया कि यह मांग कर्मचारियों के बेहतर कार्य-जीवन संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) से जुड़ी कमियों को दूर करने और कर्मचारियों-अधिकारियों को इसका उचित लाभ सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। यूनियनों का कहना है कि स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए एकतरफा लागू की गई पीएलआई योजना को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए, क्योंकि इससे जुड़े मुद्दे अभी भी समझौते की प्रक्रिया में लंबित हैं। यूनियन सचिव कुलदीप ओझा ने बताया कि हड़ताल के अन्य प्रमुख मुद्दों में पेंशन के लंबित मामलों का स्थायी समाधान और पुराने द्विपक्षीय समझौते के अनुसार केंद्रीय मुद्दों का निराकरण भी शामिल है। यूनियनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे। इसमें 27 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन और आने वाले महीनों में आंदोलन को और तेज करने की रणनीति शामिल है।

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