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दशा हुमड़ दिगंबर जैन समाज ने समाज हित में लिए सहासिक निर्णय : सभी समाज प्रेरणा ले...!

राजस्थान Published by: राजेश जैन दद्दू Updated Thu, 18 Dec 2025 01:33 AM
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राजेश जैन दद्दू 

डुंगरपुर.

डुंगरपुर  में 6 जिलों के 77 गांवों की महत्वपूर्ण बैठक और पहला अधिवेशन हुआ। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि हुमड्‌पुरम में भारतवर्षीय 18 हजार दशा हुमड़ दिगंबर जैन समाज का पहला अधिवेशन एकता, अनुशासन और संस्कारों को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।

राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश खोड़निया के नेतृत्व में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के छह जिलों के 77 गांवों के अध्यक्ष, सेठ और प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समाज के संरक्षकों और पदाधिकारियों की उपस्थिति में लिए गए ऐतिहासिक  निर्णयों पर समाज ने सर्वसम्मति से मुहर लगाई।

बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि बदलते समय में परिवार, समाज और धर्म की मर्यादाओं को और मजबूत रखना आवश्यक है, और यही उद्देश्य लेकर जैन समाज ने कई सकारात्मक और अनुकरणीय निर्णय पारित किए। इस दौरान आय-व्यय का विवरण सीए निलेश संघवी ने प्रस्तुत किया। हुमड़पुरम का यह ऐतिहासिक अधिवेशन जैन समाज की संगठित, अनुशासित और प्रगतिशील सोच का प्रतीक बना।

बैठक संरक्षक मोहनलाल पिंडारमिया, धनपाल लालावत, बसंतलाल सर्राफ, चांदमल खोड़निया, हुकमचंद सेठ, हीरालाल घोड़ा, धनपाल शाह, कोषाध्यक्ष प्रमोद शाह, राजेश जैन, दीपेश लालावत के आतिथ्य में हुई। प्रवक्ता मुकुल भुता व प्रदीप सेठ ने बताया कि बैठक में पारिवारिक, सामाजिक एवं धार्मिक मर्यादाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय सर्वसम्मति से समाजजनों ने पारित किए। साथ ही सभी गांवों के पंच महानुभवों को इन निर्णय की पालना सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

बैठक में हाई पावर कोर्डिनेशन कमेटी के संयोजक अशोक जैन, महासचिव ऋषभ जैन, साधना कोठारी, वीरेंद्र सेठ, शिक्षण प्रबंधन समिति अध्यक्ष निकुंज शाह, नर्सिंग प्रबंधन समिति अध्यक्ष सौरभजैन, बांसवाड़ा युवा महासभा अध्यक्ष कोठारी, डूंगरपुर युवा कल्पित कोठारी, डूंगरपुर युवा महासभा अध्यक्ष अभिषेक जैन, प्रतापगढ़ युवा महासभा अध्यक्ष प्रवीण पंचोरी, महिला महासभा संरक्षक उषा खोड़निया, बांसवाड़ा महिला महासभा अध्यक्ष रीता सेठ, डूंगरपुर महिला महासभा अध्यक्ष कौशल्या सरिया, प्रतापगढ़ महिला महासभा अध्यक्ष नैना डागारिया सहित समाज के कई वक्ताओं ने अपने-अपने विचार सभा में रखे।

1. विवाह के बाद बढ़ते अनावश्यक विवादों को रोकने के लिए युवा एवं महिला महासभा की संयुक्त सलाहकार समिति का गठन होगा।

2. सभी विवाह समाज की ओर से निर्धारित परफोर्मा के अनुसार स्वीकृत होंगे। इससे विवाह आयोजन अधिक अनुशासित, जिम्मेदार और व्यवस्थित बनेंगे। एवं समाज में प्री-वेडिंग शुट पुर्णता बंद होगी। और सामुहिक विवाह के आयोजन किए जाएंगे।

3. समाज ने युवाओं को समाज की मर्यादाओं, परंपराओं और धार्मिक संस्कारों के अनुरूप विवाह करने के लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया।

4. समाज दिवाली 2026 के बाद सामूहिक विवाह समारोह करेगा। इस अवधि में व्यक्तिगत विवाहों की अनुमति नहीं दी जाएगी। पंडाल, भोजनशाला और सभी व्यवस्थाएं सामूहिक भावना से समाज की ओर से जाएंगी।

5. शादी और गणेश स्थापना में उपहार (गिफ्ट) देना-लेना पूर्णतः बंद रहेगा। इसके बजाय वह राशि समाज के शिक्षा अभियान को समर्पित की जाएगी। 6. किसी भी सामाजिक आयोजन में प्री-वेडिंग शूट के फोटो प्रदर्शित नहीं किए जाएंगे। उल्लंघन पर पदाधिकारी कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे व कार्रवाई भी होगी।

7. समय, धन, संसाधन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अब समाज डिजिटल निमंत्रण को बढ़ावा देगा।

8. हुमड़पुरम स्थित डीएचएसएस विद्यालय और कॉलेज में समाज के बच्चों को अध्ययन के लिए प्रेरित करने के लिए बड़ा अभियान चलाया जाएगा।

  • सागवाड़ा. अधिवेशन में संबोधित करते समाज के राष्ट्रीय अध्यक्षा खोइ‌निया।
  • शादी और गणेश स्थापना में गिफ्ट वितरण बंद करेंगे, यह राशि शिक्षा दान में समर्पित करेंगे.

9. आयुर्वेद कॉलेज, नर्सिंग व जीएनएम के लिए सहयोग राशि ली जाएगी। समाज की भविष्य की शिक्षा परियोजनाओं के लिए गांव-गांव से सहयोग राशि एकत्र की जाएगी।

10. समाज के नवगठित पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह हुमड़पुरम में 28 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा।

11. युवा महासभा, महिला महासभा और सामूहिक विवाह समिति की इकाइयां गांव-गांव में बनाई जाएंगी, जिससे जनजागरण और सामाजिक अनुशासन को मजबूती मिलेगी

12. समाज के बड़े गांवों में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा, जिससे शिक्षा और उत्कृष्टता को निरंतर प्रेरणा मिले।

  • विश्व जैन संगठन एवं जिन शासन एकता संघ के राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन ने भारत वर्षीय सकल जैन समाज से आह्वान करते हुए कहा कि हमें भी हुमडं जैन समाज ने लिए सहासिक एवं अनुकरणीय निर्णय पर सकल जैन समाज को पालन करना चाहिए।
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