इंदौर.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीआरटीएस को हटाने के फैसले की घोषणा की है, जिसका मामला पहले न्यायालय में लंबित था। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस मुद्दे पर स्पष्ट किया था कि बीआरटीएस हटाने के लिए याचिका दायर की गई थी और अब सरकार स्वयं इसे हटाने की योजना बना रही है, जिससे कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी। इसके साथ ही, सरकार के पक्ष को सुनने के बाद, बीआरटीएस को हटाने का निर्णय लिया गया है, और यह निर्णय अब अमल में लाया जाएगा।
1. बीआरटीएस का हटना : बीआरटीएस को हटाने का फैसला शहर के ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए लिया गया है। यह कदम शहरवासियों के लिए बेहतर यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करेगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, बीआरटीएस के हटने से शहर के ट्रैफिक में सुगमता आएगी और यातायात की समस्या को कम किया जाएगा।
2. नए ब्रिज का निर्माण : महापौर ने यह भी बताया कि बीआरटीएस के हटने से भविष्य में नए ब्रिज बनाने की प्रक्रिया में भी सुगमता आएगी, जिससे शहर के यातायात को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
3. शहर की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए : बीआरटीएस को हटाने का यह निर्णय शहर को जिस बदलाव की लंबे समय से आवश्यकता थी, उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। यह निर्णय शहरवासियों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है, और इसकी त्वरित प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
4. जल्दी लिया जाएगा निर्णय : महापौर ने कहा कि बीआरटीएस को हटाने का निर्णय जल्द ही लागू किया जाएगा, जिससे शहर में ट्रैफिक की स्थिति को सुधारा जा सके और यातायात के ढांचे में आवश्यक बदलाव किए जा सकें।
हाई कोर्ट के निर्देश के बीआरटीएस को तोड़ने का रास्ता साफ हो गया है। वर्तमान में कारिडोर पूरा करने में बस को 40 मिनट का समय लगता है, लेकिन आइ-बसों का मिक्स लेन में संचालन होने पर 15 मिनट का अतिरिक्त समय लगेगा। इसके साथ ही सड़क किनारे नए बस स्टाप भी बनाने होंगे।